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Home»प्राकृतिक आपदा»उत्तराखंड में फटा बादल, 2013 की तरह एक बार पुनः मची तबाही, चारों तरफ सिर्फ नजर आ रहा मलबा
प्राकृतिक आपदा

उत्तराखंड में फटा बादल, 2013 की तरह एक बार पुनः मची तबाही, चारों तरफ सिर्फ नजर आ रहा मलबा

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उत्तराखंड में मची तबाही

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली के पास खीर गंगा नदी के ऊपर बादल फटने से बाढ़ आ गई, जिससे वहां स्थित 20-25 होटल और होम स्टे के बहने और 50 लोगों के लापता होने की सूचना है। CM पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर बताया कि राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, जिला प्रशासन की टीम युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। डीएम ने बताया कि इस घटना में अभी तक 4 लोगों की मौत हो गई है. वहीं, भूस्खलन में सेना के कुछ जवानों के लापता होने की भी खबर है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तराखंड के धराली में चीखते चिल्लाते दिखे लोग

उत्तरकाशी के धराली गांव की ओर एक पहाड़ी से पानी की तेज धारा बहते हुए कई घरों को बहा ले जाती हुई दिखाई दे रही है, जिसमें भयावह दृश्य सामने आए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए हैं जिनमें लोग दहशत में चीखते-चिल्लाते सुनाई दे रहे हैं।

हर्षिल के पास स्थित धराली इलाके में मंगलवार सुबह बादल फट गया।इस घटना में एक गांव बह गया और कई निवासी लापता हो गए हैं।अचानक जल स्तर बढ़ने के बाद स्थानीय बाजार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना मिली है, जिसके बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), और भारतीय सेना ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रकृति से छेड़छाड़  करने से होगा नुकसान

बादल फटना एक कुदरती प्रक्रिया है,लेकिन नदी किनारे ऐसे निर्माण तबाही को दावत देना है। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे 30 सेकेंड में कैसे दर्जनों मकान बहते चले गए। इतनी बड़ी प्रकृति का आपदा का एक प्रमुख कारण यह भी की है कि जब मनुष्य प्रकृति से छेड़छाड़ करता है तो उसका खामियाजा उसको भुगतना ही पड़ता है यदि यह प्रकृति को नुकसान पहुंचाएंगे यदि या पेड़ पौधों को काटेंगे  और प्रकृति को जड़ से उखाड़ने या फिर  वहां पर पुल आदि बनाने का प्रयास करेंगे तो प्रकृति उसको बर्दाश्त नहीं करेगी

बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदा से पानी आते ही वहां चीख पुकार मच गई, लेकिन लोगों को भागने का मौका नहीं मिला. सैलाब के साथ बड़े बड़े पत्थर और लकड़ी के लट्ठे भी बहते हुए नीचे आए और जिनकी चपेट में आने से कई लोगों के हताहत होने की आशंका है.

केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि बादल फटने से ये नुकसान हुआ है। उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में ये बड़ी घटना हुई है। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बड़े पैमाने पर युद्धस्तर पर बचाव अभियान चल रहा है। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ को बचाव कार्य में लगाया गया है।

उत्तराखंड में उत्तरकाशी और धराली आया चपेट में

धराली के निकट गंगोत्री का शीतकालीन प्रवास स्थल है। पहाड़ों के बीच जो नदी बहती है, जिसे खीर गंगा कहते हैं। धराली गांव पर ये पूरी आपदा आई है।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि ये पूरा हिमालयी क्षेत्र खतरे की चपेट में है। ऐसी लगातार प्राकृतिक आपदाएं संकट का कारण है।

बादल फटने जैसी समस्या उत्तराखंड के उत्तरकाशी और धारली जैसे क्षेत्र में आई है जहां पर पूरी की पूरी बस्ती कुछ ही सैकड़ो में मलबे में तब्दील हो गई।

यहां पर निष्कर्ष निकलता है कि हम सभी को प्रकृति का सम्मान करना चाहिए उसे किसी प्रकार से उजाड़ने या हटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि प्रकृति में देवत्व विराजमान है। यदि हम उनका सम्मान करेंगे तभी हमें बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इसके अलावा प्रकृति के इस देवी क्षेत्र में जाकर के किसी प्रकार की ऐसे कार्य न करें जो प्राकृतिक संतुलन को बिगड़ने का कार्य करें।

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