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हिंदू पंचाग के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन कामदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 18 अप्रैल, गुरुवार को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो चुका है, जिसका समापन आज यानी 19 अप्रैल को संध्याकाल 08 बजकर 04 मिनट पर होगा। 

नवमी के दिन पूजी जाने वाली देवी मां सिद्धिदात्री का स्वरूप गौर, दिव्य और शुभता प्रदान करने वाला है। मां सिंह वाहन और कमल पर भी आसीन होती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं, दाहिने ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल है। मां को बैंगनी और लाल रंग अतिप्रिय होता है। माना जाता है मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ और इन्हें अर्द्धनारीश्वर कहा गया।

अष्टमी तिथि के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात महागौरी की पूजा में श्वेत, लाल या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें एवं सर्वप्रथम कलश पूजन के पश्चात मां की विधि-विधान से पूजा करें। देवी महागौरी को चंदन, रोली, मौली, कुमकुम, अक्षत, मोगरे का फूल अर्पित करें व देवी के सिद्ध मंत्र श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: का जाप करें।

मान्यता है कि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से भूत, प्रेत या बुरी शक्तियों से छुटकारा मिलता है और भय समाप्त होता है। जो भक्त निश्चल भाव से माता की पूजा करते हैं।  श्रद्धा व भक्ति भाव से पूजा करने से कालरात्रि माता अपने भक्तों पर प्रसन्न होती है और उन्हें विशेष आशीर्वाद प्रदान करती हैं उनके जीवन को सुख समृद्धि और खुशियों से भर देती है।

नवरात्रि के छठे दिन मां का कात्यायनी की पूजा करने के लिए के लिए सुबह नहाने के बाद साफ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लेना चाहिए।मां कात्यायनी को पीला रंग प्रिय है इसलिए पूजा के लिए पीले रंग का वस्त्र धारण करना शुभ होता है।

नवरात्रि के पांचवें दिन स्‍कंदमाता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का पांचवा रूप स्‍कंदमाता कहलाता है। प्रेम और ममता…

नवरात्रि के चौथे दिन देवी  मां के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि का  हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मां भगवती के स्वरूप माता कुष्मांडा के अवतार की पूजा करना शुभदायक माना जाता है। माता का यह रूप अत्यंत परम शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता

नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्र के नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल से हुई थी। नवरात्रि का  हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। नवरात्रि की तीसरे दिन मां भगवती के स्वरूप माता चंद्रघंटा का अवतार परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।

आज यानी 10 अप्रैल को नवरात्रि का दूसरा दिन है।       वहीं इस दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा- अर्चना की जाती है।  चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू हो गए हैं ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य है -‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या है और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली यानी तप का आचरण करने वाली देवी। 

नवरात्रि की प्रतिदिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन सबसे पहले कलश स्थापना करके माता का आवाहन किया जाता है उसके पश्चात पूजा अर्चना आदि किया जाता है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।