लखनऊ। देश में तेजी से बढ़ते कोविड-19 के मामलों और और इनसे बचाव के लिए देश में तीन महीनें से ज्यादा का लॉकडाउन का समय आने वाले कई दशकों भुलाया नहीं जा सकेगा।
शुरूआती दौर में देश में बाहर से आ रही डरावनी खबरों के कारण लोग घरों में दुबकने पर मजबूर हो गये। बीमारी की भयवाह स्थिति की गंभीर आशंका के चलते देश में शुरू हुआ जनता कर्फ्यू धीरे धीरे सख्त कर्फ्यू में बदलता जा रहा था। इन सबके बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो युवा जो भले ही मुख्यधारा मीडिया के लिए हेडलाइन का विषय न हो लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से उनके द्वारा खुद को जोखिम में डालकर लोगों की मदद करने का जज्बा सराहना का विषय जरुर है।
कानपूर निवासी ओमप्रकाश बताते है, कि मेरा बेटा लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती था। उसे तीन यूनिट खून की जरुरत थी। दो यूनिट खून का इंतजाम हो चुका था और एक यूनिट खून की जरुरत थी। लखनऊ में घर-परिवार के काफी लोग रहते है, पर समझ नही आ रहा था कि इस मौके पर किसको बुलाये ? क्योकि लॉकडाउन चल रहा था और हर चौराहे पर आने-जाने वाले लोगों को पुलिस रोक रही थी। ऐसे में किसी को अस्पताल बुलाना काफी मुश्किल भरा था। ऐसे में किसी सहयोगी के माध्यम से लखनऊ के युवा समाजसेवी विमिलेश निगम का नम्बर मिला और विमिलेश ने समाजसेवी राहुल सिंह का नम्बर दिया। एक घंटे बाद राहुल सिंह अपने कुछ साथियों के साथ सिविल अस्पताल में हाजिर थे। आते ही उन्होंने खून की व्यवस्था कराई। मै थोड़ा संकोच में था कि इन्हें क्या कहूँ ? क्योकि अस्पताल तक आने में मुझे पता था कि कम से कम पांच पुलिस बैरियर लड़-झगड़ कर पार करके ये लोग आये है। किसी ऐसे इंसान को खून देने के लिए जिसे ये जानते तक नहीं। धन्यवाद, शायद छोटा शब्द होगा मै हमेशा आभारी रहूँगा। जो वक्त पर काम आ जाए वही अपना ….ओमप्रकाश आगे कहते है कि मेरे नजर में ऐसे लोग समाज के वास्तविक “नायक” हैं।
संकट के समय दमदार नेतत्व के रूप में उभरे इन चेहरों की कहानियों से आपको परिचित कराने के लिए देश के यूथ मीडिया प्लेटफॉर्म “इंडिया मित्र” ने सीरीज लॉकडाउन के सितारे के तहत एक मुहिम शुरू की है। अक्सर ऐसे मददगार सुर्ख़ियों में आने के बजाय गुमनाम रहना ज्यादा पसंद करते है। लेकिन “इंडिया मित्र” का मानना है कि नेकी के काम लोगों की नजर में आने से लाखों-करोड़ों लोगों को अच्छा कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
आइये मिलाते है, आज के सितारे राहुल सिंह से जिनके प्रयासों से सैकड़ों लोगो के चेहरों पर मुस्कान बरकरार है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के फेफना गाँव के निवासी राहुल सिंह किसान परिवार से ताल्लुक रखते है।
राहुल बताते है,”बचपन गाँव में गुजरा है लोगों की समस्याओं और दिक्कतों को काफी करीब से जाना समझा है। कोई खास उपलब्धि तो नही है मेरे पास लेकिन जितना संभव हो सकता है लोगों के काम आने का प्रयास जरुर करता हूँ।
बलिया से इंटरमीडिएट करके लखनऊ विश्वविद्यालय आये राहुल का उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के हजारों लाखो ग्रामीण युवको की तरह सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का था।
जिसके लिए राहुल ने एनसीसी का कोर्स किया और बेस्ट कैडेट का प्रमाणपत्र भी हासिल किया। नेशनल डिफेंस अकादमी की परीक्षा उतीर्ण करने के बाद राहुल का चयन मेडिकल में अनफिट होने की वजह से सेना में नही हो पाया।
राहुल बताते है, उसके बाद एक सरकारी सेवा में चयन हुआ लेकिन नौकरी रास नहीं आई। बचपन से ही बाबा को गाँव घर के लोगों के लिए किसान हक़ की लड़ाई लड़ते हुए देखा है।
नौकरी करके सिमित होने के बजाय समाज सेवा और राजनीति में रूचि बढती गयी और समाजवादी पार्टी की नीतियों ने प्रभावित होकर मैंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली है और एक कार्यकर्त्ता की तरह कार्य कर रहा हूँ। वर्तमान समय में राहुल लखनऊ में रहकर व्यवसाय करते है और समाजवादी पार्टी में युवजन प्रदेश सभा के सदस्य हैं।
सीरीज
“Lockdown के सितारे” के तहत हम ऐसे लोगों से आपकी मुलाक़ात कराते रहेंगे जो लॉकडाउन की कठिन परिस्थितियों में भी लोगो की मदद करने में पीछे नही हटे। अगर आप भी किसी ऐसे
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