भारत की बेटियाँ आज हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। इसी कड़ी में हरियाणा की लेफ्टिनेंट शनन ढाका ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा में महिलाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पहली उम्मीदवार बनीं। अब चार वर्ष के कठिन सैन्य प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला है।शनन ढाका मूल रूप से हरियाणा के रोहतक जिले के सुंदराना गाँव से हैं। उनका परिवार पीढ़ियों से देश सेवा से जुड़ा रहा है। उनके दादा भारतीय सेना में सूबेदार रहे, पिता विजय ढाका सेना में नायब सूबेदार रहने के बाद पंचकूला पुलिस में सेवा दे रहे हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन भी सैन्य सेवा से जुड़ी हैं। ऐसे प्रेरणादायक वातावरण ने शनन के भीतर बचपन से ही देश सेवा का जज़्बा पैदा किया।साल 2021 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद पहली बार महिलाओं को NDA प्रवेश परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। इसी परीक्षा में शनन ढाका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 10 हासिल की और महिलाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। इसके बाद उन्होंने NDA और फिर भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून में प्रशिक्षण पूरा किया। 13 जून 2026 को उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्रदान किया गया।शनन ढाका की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। उनकी यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नए भारत की बदलती सोच का भी सशक्त उदाहरण है।निष्कर्ष:
लेफ्टिनेंट शनन ढाका की सफलता हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उनकी प्रेरणादायक यात्रा आने वाली पीढ़ियों, विशेषकर बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती है। देश को ऐसी वीर और प्रतिभाशाली बेटियों पर गर्व है।
पहली महिला NDA टॉपर बनीं हरियाणा की शनन ढाका, अब बनीं सेना में लेफ्टिनेंट
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