मुगल सम्राट अकबर का दरबार अपनी भव्यता और न्यायप्रियता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध था। उस दरबार में अनेक विद्वान, कवि, मंत्री और सेनापति उपस्थित रहते थे, लेकिन उन सभी में सबसे अधिक सम्मान बीरबल को मिलता था। उनकी बुद्धिमानी, चतुराई और हाजिरजवाबी के कारण अकबर अक्सर कठिन से कठिन प्रश्नों का उत्तर भी उनसे ही पूछते थे।
एक दिन अकबर ने दरबार में उपस्थित सभी दरबारियों से प्रश्न किया, “बताइए, संसार का सबसे अनमोल धन क्या है?”
यह सुनकर सभी दरबारी अपने-अपने उत्तर देने लगे। किसी ने कहा, “सोना सबसे बड़ा धन है।” दूसरे ने कहा, “हीरे-मोती सबसे अनमोल हैं।” किसी ने विशाल राज्य को सबसे बड़ा धन बताया, तो किसी ने सेना और शक्ति को।
अकबर ने अंत में बीरबल की ओर देखा और पूछा, “बीरबल, तुम्हारा क्या विचार है?”
बीरबल ने विनम्रता से उत्तर दिया, “जहाँपनाह, संसार का सबसे बड़ा धन बुद्धि और विवेक है। यदि मनुष्य के पास बुद्धि है, तो वह खोया हुआ धन भी वापस कमा सकता है। लेकिन यदि बुद्धि नहीं है, तो अपार धन भी अधिक समय तक टिक नहीं सकता।”
कुछ दरबारियों को बीरबल की बात पसंद नहीं आई। वे बोले, “यह कैसे संभव है? धन के बिना कोई भी सुखी नहीं रह सकता।”
अकबर ने कहा, “बीरबल, यदि तुम अपनी बात सिद्ध कर दो, तो मैं मान लूँगा कि बुद्धि ही सबसे बड़ा धन है।”
कुछ दिनों बाद बीरबल ने एक योजना बनाई। उन्होंने एक बहुत अमीर व्यापारी और एक गरीब लेकिन बुद्धिमान किसान को दरबार में बुलवाया।
व्यापारी के पास अथाह संपत्ति थी, लेकिन जब बीरबल ने उससे एक साधारण समस्या का समाधान पूछना चाहा, तो वह घबरा गया। वह धन कमाने में तो सफल था, लेकिन कठिन परिस्थिति में सही निर्णय नहीं ले पाया।
फिर बीरबल ने किसान से वही प्रश्न पूछा। किसान ने शांत मन से परिस्थिति को समझा और कुछ ही क्षणों में ऐसा समाधान दिया कि सभी दरबारी आश्चर्यचकित रह गए। उसका उत्तर इतना सरल और तर्कपूर्ण था कि अकबर स्वयं उसकी प्रशंसा करने लगे।
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, “महाराज, यही बुद्धि की शक्ति है।
धन मनुष्य को सुविधाएँ दे सकता है, लेकिन सही समय पर सही निर्णय केवल बुद्धि ही दिलाती है। बुद्धिमान व्यक्ति यदि निर्धन भी हो, तो अपनी मेहनत और समझदारी से फिर सफल हो सकता है।”
अकबर ने सिर हिलाते हुए कहा, “आज तुमने फिर सिद्ध कर दिया कि सच्चा धन बुद्धि ही है।”
इसके बाद अकबर ने सभी दरबारियों से कहा, “धन का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। धन आज है, कल नहीं भी हो सकता है। लेकिन ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि मनुष्य की ऐसी पूँजी है, जो हर कठिनाई में उसका साथ देती है।”
उस दिन के बाद दरबारियों ने भी समझ लिया कि केवल धनवान होना ही महानता नहीं है। सच्ची महानता अच्छे विचारों, ज्ञान और बुद्धिमानी में होती है।
शिक्षा:
जीवन में धन आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक मूल्यवान बुद्धि, ज्ञान और विवेक हैं। बुद्धिमान व्यक्ति हर कठिन परिस्थिति का समाधान खोज लेता है और अपने परिश्रम से सफलता प्राप्त कर लेता है।

