परिचय
भारत अपनी भाषाई विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। देश में अनेक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं, लेकिन लंबे समय तक आधुनिक AI और Speech Recognition तकनीक का लाभ मुख्य रूप से कुछ प्रमुख भाषाओं तक ही सीमित रहा। अब भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने SraVaani नामक एक बहुभाषी Speech Recognition मॉडल विकसित करके इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
SraVaani क्या है?
SraVaani एक AI आधारित Speech-to-Text मॉडल है, जो बोली गई भाषा को पहचानकर उसे लिखित टेक्स्ट में बदल सकता है। यह मॉडल 65 भारतीय भाषाओं और बोलियों को सपोर्ट करता है। इनमें 20 अनुसूचित भाषाएँ तथा 45 क्षेत्रीय भाषाएँ और बोलियाँ शामिल हैं।
इस मॉडल को IISc की SPIRE Lab ने ARTPARK के सहयोग और Google के समर्थन से विकसित किया है। इसे 13 अगस्त 2026 को सार्वजनिक किया गया और यह ओपन-सोर्स रूप में उपलब्ध कराया गया है।
किन भाषाओं को मिलेगा लाभ?
SraVaani की खासियत यह है कि यह केवल प्रमुख भारतीय भाषाओं तक सीमित नहीं है। इसमें Garo, Angika, Chakma, Kokborok, Tulu, Bundeli और Bajjika जैसी अपेक्षाकृत कम डिजिटल संसाधन वाली भाषाएँ और बोलियाँ भी शामिल हैं।
शोध के अनुसार, मॉडल लगभग 25 करोड़ लोगों तक Speech AI की पहुँच बढ़ाने की क्षमता रखता है, जिनकी भाषाओं को मौजूदा तकनीकों में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता।
शिक्षा और डिजिटल सेवाओं में महत्व
SraVaani का उपयोग शिक्षा, डिजिटल सेवाओं, Voice Assistant और अन्य AI आधारित सेवाओं में किया जा सकता है। इससे ऐसे विद्यार्थी और नागरिक भी अपनी मातृभाषा या स्थानीय बोली में तकनीक से संवाद कर सकेंगे, जिन्हें अंग्रेजी या कुछ चुनिंदा भाषाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी ऐसी तकनीक डिजिटल भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकती है। इससे भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री तैयार करने और AI आधारित सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने की संभावना बढ़ती है।
तकनीकी उपलब्धि
SraVaani को बड़े पैमाने के भारतीय भाषाई Speech Data पर प्रशिक्षित किया गया है। शोध में लगभग 31,000 घंटे से अधिक Speech Data का उपयोग किया गया। मॉडल ने कई परीक्षणों में अच्छे परिणाम दिए और कम संसाधन वाली भाषाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्षमता दिखाई।
निष्कर्ष
SraVaani भारत में समावेशी और भारतीय भाषाओं पर आधारित AI की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि भाषाई विविधता को डिजिटल दुनिया में स्थान देने का प्रयास भी है। आने वाले समय में ऐसी तकनीक शिक्षा, प्रशासन और डिजिटल सेवाओं को भारतीय भाषाओं में अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
मॉडल: SraVaani
क्षेत्र: Artificial Intelligence / Speech Recognition
भाषाएँ व बोलियाँ: 65
अनुसूचित भाषाएँ: 20
क्षेत्रीय भाषाएँ/बोलियाँ: 45
प्रमुख संस्थान: IISc
सहयोग: ARTPARK और Google
जारी: अगस्त 2026
मुख्य उद्देश्य: भारतीय भाषाओं के लिए Speech-to-Text तकनीक को अधिक समावेशी बनाना।

