भारत त्योहारों और परंपराओं का देश है। यहाँ हर त्योहार हमें जीवन जीने की कोई न कोई महत्वपूर्ण सीख देता है। ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह पर्व सत्य, धर्म, साहस और अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
दशहरा हमें याद दिलाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है। यह त्योहार हमें अपने भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और लालच जैसी बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा भी देता है।
रामायण की मान्यता के अनुसार, लंका के राजा रावण ने माता सीता का हरण किया था। माता सीता को मुक्त कराने और अधर्म का अंत करने के लिए भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध किया। अंततः श्रीराम ने रावण का वध किया। इसी विजय की स्मृति में दशहरा मनाया जाता है।
2. माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय
दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर का वध करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। यह विजय शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। देश के कई हिस्सों में विजयादशमी को माँ दुर्गा की विजय से भी जोड़कर दे
दशहरे वाले दिन क्या होता है?
दशहरे के दिन देशभर में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार उत्सव मनाए जाते हैं।
रावण दहन: कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
रामलीला का समापन: अनेक शहरों और गाँवों में रामलीला के अंतिम प्रसंगों का मंचन किया जाता है।
माँ दुर्गा की पूजा: कई क्षेत्रों में माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन और विजयादशमी की विशेष पूजा की जाती है।
शस्त्र पूजा: कुछ परंपराओं में अस्त्र-शस्त्र, औजारों, पुस्तकों और कार्य में उपयोग होने वाली वस्तुओं की पूजा की जाती है।
शुभ कार्यों की शुरुआत: बहुत से लोग इस दिन को नए कार्य, शिक्षा या व्यवसाय की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं।
आज के समय में दशहरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
शहरों में: बड़े मैदानों में रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रावण दहन का आयोजन होता है।
गाँवों में: लोग मंदिरों में पूजा करते हैं, मेलों में जाते हैं और परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं।
बच्चों और युवाओं में: रामायण के पात्रों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से त्योहार की परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है।
परिवारों में: लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
आधुनिक जीवन में: लोग सोशल मीडिया पर शुभकामना संदेश, धार्मिक लेख और भगवान श्रीराम तथा माँ दुर्गा के चित्र साझा करके भी पर्व की खुशी मनाते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की भी है कि हम त्योहार मनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें, पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाएँ और सभी के साथ प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखें।
रावण दहन से हमें क्या सीख मिलती है?
रावण विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार और अधर्म उसके विनाश का कारण बना। इसलिए दशहरा हमें सिखाता है कि केवल ज्ञान और शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग करना भी आवश्यक है।
रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से दस बुराइयों से जोड़कर भी समझा जाता है, जैसे अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, मोह और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियाँ।
सच्चा दशहरा तभी होगा, जब हम अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करके सत्य, दया, ईमानदारी और अच्छे कर्मों को अपनाएँगे।
दशहरा 2026 का विशेष संदेश
इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026 को उत्तर भारत सहित अधिकांश क्षेत्रों में दशहरा मनाया जा रहा है। यह पर्व हमें नई शुरुआत करने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों के सामने हार न मानने की प्रेरणा देता है।
चाहे विद्यार्थी हों, शिक्षक हों, व्यापारी हों या कोई अन्य व्यक्ति—हर किसी के जीवन में दशहरे का संदेश महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के लिए यह मेहनत और अनुशासन का, शिक्षकों के लिए अच्छे संस्कार देने का और समाज के लिए एकता तथा सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।

