बहुत समय पहले मुगल बादशाह अकबर का दरबार अपनी भव्यता और विद्वान लोगों के लिए प्रसिद्ध था। बादशाह अकबर के दरबार में कई बुद्धिमान मंत्री थे, लेकिन बीरबल की बात ही कुछ अलग थी। उनकी समझदारी, तर्क और हाजिरजवाबी के किस्से दूर-दूर तक मशहूर थे।
एक दिन सुबह बादशाह अकबर के दरबार में एक अमीर व्यापारी बहुत परेशान हालत में पहुँचा। उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
अकबर ने पूछा,
“व्यापारी, तुम इतने परेशान क्यों हो? क्या कोई बड़ी समस्या हो गई है?”
व्यापारी ने हाथ जोड़कर कहा,
“जहाँपनाह! मेरे घर से सोने के आभूषणों से भरी एक छोटी संदूकची चोरी हो गई है। उसमें मेरी पत्नी के गहने और कुछ जरूरी कागजात थे। मुझे पूरा विश्वास है कि चोरी मेरे घर में काम करने वाले लोगों में से ही किसी ने की है।”
अकबर ने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया कि व्यापारी के घर में काम करने वाले सभी लोगों को दरबार में बुलाया जाए।
कुछ ही देर में चार नौकर दरबार में खड़े थे। चारों के चेहरे पर डर था।
अकबर ने सख्त आवाज में कहा,
“तुम चारों में से जिसने भी चोरी की है, वह सच बता दे। अगर अभी सच बोल दिया तो सजा कम हो सकती है। लेकिन झूठ बोलने वाले को कड़ी सजा मिलेगी।”
चारों नौकर चुप रहे।
अकबर ने बीरबल की ओर देखा और कहा,
“बीरबल, अब तुम ही पता लगाओ कि चोर कौन है।”
बीरबल ने चारों नौकरों को ध्यान से देखा। फिर उन्होंने सभी से कुछ सामान्य सवाल पूछे।
“तुम व्यापारी के घर में कब से काम कर रहे हो?”
एक ने कहा, “पाँच साल से।”
दूसरे ने कहा, “तीन साल से।”
तीसरे ने कहा, “दो साल से।”
चौथे ने कहा, “लगभग एक साल से।”
बीरबल ने फिर पूछा,
“चोरी वाली रात तुम सब कहाँ थे?”
चारों ने अपने-अपने जवाब दिए। सभी के जवाब लगभग एक जैसे थे।
बीरबल कुछ देर शांत रहे। फिर उन्होंने कहा,
“ठीक है। मुझे चोर का पता लगाने में थोड़ा समय लगेगा। तुम चारों को आज रात एक कमरे में रखा जाएगा।”
अकबर ने आश्चर्य से पूछा,
“क्या तुम उन्हें बंद करके चोर का पता लगाओगे?”
बीरबल मुस्कुराए और बोले,
“जहाँपनाह, चोर को पकड़ने के लिए हमेशा सबूत की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी इंसान का डर ही उसके बारे में बहुत कुछ बता देता है।”
अकबर ने अनुमति दे दी।
बीरबल ने चारों नौकरों को एक कमरे में बुलाया और प्रत्येक को एक-एक लकड़ी की छड़ी दी।
उन्होंने कहा,
“ये चारों छड़ियाँ बिल्कुल एक जैसी हैं। मैंने इनमें एक खास जादू किया है। कल सुबह जिस व्यक्ति के पास चोर वाली छड़ी होगी, उसकी छड़ी अपने आप दो अंगुल लंबी हो जाएगी।”
चारों नौकर घबरा गए।
बीरबल ने आगे कहा,
“इसलिए रात भर अपनी छड़ी को मत छेड़ना। सुबह मैं देखूँगा कि किसकी छड़ी लंबी हुई है।”
यह कहकर बीरबल वहाँ से चले गए।
चारों नौकरों को एक कमरे में रखा गया।
कुछ देर बाद उनमें से एक नौकर बहुत बेचैन होने लगा। वह बार-बार अपनी छड़ी को देखता और फिर बाकी लोगों की तरफ देखता।
आधी रात को उसने चुपचाप अपनी छड़ी का थोड़ा सा हिस्सा काट दिया।
उसने मन ही मन सोचा,
“अगर सच में यह छड़ी सुबह दो अंगुल लंबी हो गई, तो मेरी छड़ी बाकी लोगों से लंबी हो जाएगी। इसलिए अभी इसे थोड़ा छोटा कर देता हूँ। सुबह जब यह बढ़ेगी तो बाकी छड़ियों जितनी ही हो जाएगी।”
अगली सुबह बीरबल कमरे में पहुँचे।
उन्होंने चारों नौकरों से छड़ियाँ लेने को कहा।
चारों ने अपनी-अपनी छड़ी बीरबल को दे दी।
बीरबल ने चारों छड़ियों को एक साथ रखा।
तीन छड़ियाँ बिल्कुल बराबर थीं, लेकिन एक छड़ी साफ तौर पर बाकी तीनों से छोटी थी।
बीरबल मुस्कुराए और बोले,
“यही है चोर!”
चौथा नौकर काँपने लगा।
अकबर भी हैरान थे।
उन्होंने पूछा,
“लेकिन बीरबल, तुम्हारी छड़ी में तो कोई जादू था ही नहीं। फिर तुमने यह कैसे पता लगा लिया?”
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा,
“जहाँपनाह, छड़ी में कोई जादू नहीं था। मैंने सिर्फ चोर के मन में डर पैदा किया था।”
फिर बीरबल ने समझाया,
“जिसने चोरी नहीं की थी, उसे मेरी बात पर विश्वास नहीं हुआ। इसलिए उसने अपनी छड़ी को छुआ तक नहीं। लेकिन असली चोर डर गया कि उसकी छड़ी सच में लंबी हो जाएगी। इसी डर के कारण उसने रात में छड़ी को काटकर छोटा कर दिया।”
अकबर जोर से हँस पड़े।
उन्होंने कहा,
“बीरबल, तुम्हारी बुद्धिमानी के सामने सचमुच कोई टिक नहीं सकता!”
चोर ने भी अपनी गलती स्वीकार कर ली और बताया कि उसने संदूकची कहाँ छिपाई थी। सैनिकों ने जाकर संदूकची बरामद कर ली।
व्यापारी को उसके सारे आभूषण वापस मिल गए। उसने बीरबल को धन्यवाद देते हुए कहा,
“आज मुझे समझ आया कि बुद्धि और धैर्य से वह काम भी आसानी से हो सकता है, जिसे ताकत से करना मुश्किल होता है।”
अकबर ने बीरबल की प्रशंसा करते हुए कहा,
“सच्ची बुद्धिमानी वही है, जिसमें बिना किसी को नुकसान पहुँचाए सच सामने आ जाए।”
कहानी से सीख
डर इंसान से वह गलती करवा सकता है, जो सामान्य परिस्थितियों में वह कभी नहीं करता।

