लखनऊ में पुलिस विभाग के 912 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी बेटी के साथ छेड़छाड़ करने वाला व्यक्ति अपने लिए गंभीर कानूनी परिणाम आमंत्रित करता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भर्ती प्रक्रिया का भी उल्लेख किया और कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भाई-भतीजावाद की शिकायतें थीं, जबकि वर्तमान व्यवस्था में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। ये बातें मुख्यमंत्री के अपने संबोधन और सरकारी पक्ष के दावे के रूप में समझी जानी चाहिए।
बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल सबसे जरूरी किसी भी समाज की प्रगति केवल सड़क, इमारत और रोजगार से नहीं मापी जाती। असली प्रगति तब है जब बेटियां बिना डर के स्कूल जाएं, नौकरी करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें और अपने सपनों को पूरा कर सकें।
महिला सुरक्षा के लिए केवल कड़े बयान ही नहीं, बल्कि प्रभावी पुलिसिंग, समय पर शिकायत पर कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और कानून का समान रूप से पालन भी जरूरी है। इसी के साथ परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी है कि बेटियों को डराने के बजाय उन्हें आत्मविश्वास और अधिकारों की जानकारी दें।
भर्ती में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण युवाओं के लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि उनके वर्षों की मेहनत और परिवार की उम्मीदों से जुड़ी होती है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता, पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर चयन का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है।
20 सितंबर 2026 को लखनऊ में 912 पुलिस अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की खबर भी इसी संदर्भ में सामने आई है।
सुरक्षित बेटियां + निष्पक्ष भर्ती + मजबूत कानून व्यवस्था = मजबूत समाज।
आखिरकार, कानून का उद्देश्य केवल अपराध के बाद सजा देना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें अपराध करने से पहले ही व्यक्ति कानून के परिणामों को समझे और बेटियां अपने अधिकारों के साथ आगे बढ़ सकें।

