विजया एकादशी का तात्पर्य है — “विजय दिलाने वाली एकादशी”।
यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और यह भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है।
विजया एकादशी का अर्थ
‘विजया’ शब्द का मतलब है जीत या सफलता।
मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और हर कार्य में विजय प्राप्त होती है।
पौराणिक कथा का सार
कथा के अनुसार, जब श्रीराम लंका जाने के लिए समुद्र पार करना चाहते थे, तब उन्होंने यह व्रत रखा था।
व्रत के प्रभाव से उन्हें युद्ध में सफलता मिली और रावण पर विजय प्राप्त हुई।
महत्व
यह व्रत पापों का नाश करता है।
मन की इच्छाएँ पूरी होती हैं।
जीवन में सफलता और सुख-समृद्धि मिलती है।
संक्षेप में, विजया एकादशी का तात्पर्य है — सत्य, श्रद्धा और भक्ति के द्वारा विजय प्राप्त करना।
एकादशी तिथि प्रारंभ:

12 फरवरी 2026, रात 08:35 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, रात 09:10 बजे
व्रत का दिन: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)
पारण (व्रत खोलने का समय): 14 फरवरी 2026, सुबह 07:00 बजे से 09:15 बजे तक
पारण द्वादशी तिथि में ही करना चाहिए
विजया एकादशी पूजा विधि (Step-by-Step)
1. व्रत का संकल्प
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
साफ कपड़े पहनें।
भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
संकल्प मंत्र:
” मैं आज विजया एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए करता/करती हूँ।”
2. पूजा की तैयारी
पूजा में ये सामग्री रखें:
पीला कपड़ा
भगवान विष्णु की फोटो या मूर्ति
फूल, तुलसी दल
धूप, दीप
फल, मिठाई
पंचामृत
3. भगवान विष्णु की पूजा
दीप जलाएं
फूल और तुलसी अर्पित करें
फल और प्रसाद चढ़ाएं
भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें
मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
कम से कम 108 बार जाप करें
4. व्रत के नियम
पूरे दिन अन्न न खाएं
केवल फल, दूध, और पानी ले सकते हैं
क्रोध, झूठ और बुरे विचारों से दूर रहें
रात में जागरण करना बहुत शुभ माना जाता है
विजया एकादशी व्रत कथा (विस्तृत)
प्राचीन समय में भगवान श्रीराम जब माता सीता को रावण से छुड़ाने के लिए लंका जा रहे थे, तब उन्हें समुद्र पार करना था। विशाल समुद्र देखकर श्रीराम चिंतित हो गए।
तब लक्ष्मण जी ने कहा कि पास में एक महान ऋषि रहते हैं, उनसे मार्ग पूछना चाहिए।
श्रीराम ऋषि बकदालभ्य के आश्रम गए और उन्हें प्रणाम किया। ऋषि ने कहा—
“हे राम, आप विजया एकादशी का व्रत करें। इससे आपको युद्ध में विजय मिलेगी।”
श्रीराम ने पूरी विधि से विजया एकादशी का व्रत किया।
इस व्रत के प्रभाव से समुद्र शांत हो गया और श्रीराम की सेना ने समुद्र पर पुल बना लिया।
इसके बाद श्रीराम ने रावण को युद्ध में पराजित कर विजय प्राप्त की।
इसलिए इस एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है।
विजया एकादशी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
विजया एकादशी का महत्व
इस व्रत से:
सभी पाप नष्ट होते हैं
हर कार्य में विजय मिलती है
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
जीवन में सफलता आती है
मोक्ष की प्राप्ति होती है
पारण विधि (व्रत खोलने की विधि)
14 फरवरी सुबह:
* स्नान करें
* भगवान विष्णु की पूजा करें
* तुलसी को जल दें
* भगवान को प्रसाद चढ़ाएं
* गरीब को दान दें
इसके बाद व्रत खोलें

