देश में डिजिटल टोल भुगतान को और आसान बनाने की दिशा में FASTag यूजर्स के लिए ‘OneTag’ सेवा शुरू की गई है। इस सुविधा के तहत वाहन मालिकों को FASTag का बैंक बदलने के लिए विंडशील्ड पर लगा पुराना FASTag स्टिकर हटाकर नया स्टिकर लगाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या है OneTag?
FASTag के जरिए वाहन चालक टोल प्लाजा पर बिना नकद भुगतान किए टोल शुल्क का भुगतान करते हैं। अब नई OneTag सुविधा का उद्देश्य FASTag को अधिक पोर्टेबल बनाना है, ताकि यूजर अपनी जरूरत के अनुसार FASTag से जुड़े बैंक को बदल सके, जबकि वाहन पर लगा भौतिक टैग वही रह सके।
पहले क्या थी परेशानी?
पहले यदि किसी वाहन मालिक को FASTag जारी करने वाला बैंक बदलना होता था, तो आम तौर पर पुराने FASTag को बंद करवाकर नए बैंक से नया FASTag लेना पड़ता था। इसके कारण नया टैग प्राप्त करना और उसे वाहन की विंडशील्ड पर लगाना पड़ता था। NPCI की मौजूदा FASTag क्लोजर/रिप्लेसमेंट व्यवस्था में पुराने टैग को बंद करने और नए टैग के लिए प्रक्रिया निर्धारित है।
OneTag से क्या फायदा होगा?
पुराने FASTag स्टिकर को हटाने की परेशानी कम होगी।
बैंक बदलने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
वाहन मालिकों का समय बचेगा।
FASTag व्यवस्था को अधिक लचीला और यूजर-फ्रेंडली बनाने में मदद मिलेगी।
डिजिटल और कैशलेस टोल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।
FASTag का इस्तेमाल देशभर में बड़े पैमाने पर हो रहा है और राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर इसकी पहुंच 98% से अधिक बताई गई है।
आगे क्या बदलेगा?
OneTag को भारत की डिजिटल टोल व्यवस्था को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार आने वाले समय में बैरियर-फ्री और अधिक डिजिटल टोलिंग सिस्टम की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
निष्कर्ष:
OneTag की सुविधा FASTag यूजर्स के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे वाहन मालिकों को बार-बार FASTag स्टिकर बदलने की झंझट से राहत मिल सकती है और भारत की कैशलेस टोल व्यवस्था और अधिक सुविधाजनक बन सकती है।

