नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में होगा। इस सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के शीर्ष नेता तथा अन्य आमंत्रित प्रतिनिधि शामिल होंगे।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जैसे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी के कारण दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। शी जिनपिंग की 12 सितंबर को भारत पहुंचने की पुष्टि चीन के विदेश मंत्रालय ने भी की है।
30 हजार तक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं के एक ही स्थान पर जुटने के कारण दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के हजारों जवान तैनात किए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था में CCTV निगरानी, महत्वपूर्ण मार्गों की निगरानी, ट्रैफिक नियंत्रण और विशेष सुरक्षा दल शामिल हैं।
भारत मंडपम और VVIP आवागमन वाले रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्थानों पर सुरक्षा अभ्यास और काफिले की रिहर्सल भी की है।
पुतिन और जिनपिंग के लिए अलग-अलग सुरक्षा व्यवस्था
रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा के लिए उनके होटल और आवागमन के रास्तों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों की सुरक्षा टीमें पहले से दिल्ली पहुंचकर स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही हैं। होटल कर्मचारियों का भी सत्यापन किया गया है।
VVIP काफिलों के लिए अलग-अलग मार्ग और वैकल्पिक रास्ते तैयार किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था केवल होटल और सम्मेलन स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट से लेकर पूरे यात्रा मार्ग तक निगरानी रखी जा रही है।
आसमान से जमीन तक निगरानी
BRICS सम्मेलन के दौरान दिल्ली के हवाई क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भी विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। ड्रोन और अन्य अनधिकृत गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिल्ली के अलावा आसपास के राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी समन्वय किया गया है, ताकि VVIP आवाजाही के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती से तुरंत निपटा जा सके।
दिल्ली में ट्रैफिक पर भी असर
सुरक्षा कारणों से राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन और प्रतिबंध लगाए गए हैं। इससे आम लोगों को कुछ असुविधा हो सकती है। प्रशासन का प्रयास है कि VVIP मूवमेंट के साथ-साथ आम जनता के लिए सार्वजनिक परिवहन और वैकल्पिक मार्गों को सुचारु रखा जाए।
BRICS सम्मेलन क्यों है महत्वपूर्ण?
BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। 2026 में इसके 11 सदस्य देश—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और UAE हैं। ये देश मिलकर विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा
भारत की 2026 की अध्यक्षता का मुख्य विषय
“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, व्यापार, निवेश, आपदा-रोधी क्षमता और वैश्विक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक अवसर
BRICS Summit भारत के लिए दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी अहम मानी जा रही हैं।
इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक तनाव मौजूद हैं। ऐसे माहौल में BRICS देशों के बीच सहयोग और साझा मुद्दों पर सहमति बनाना सम्मेलन की बड़ी चुनौती भी होगी।
**कुल मिलाकर, 12-13 सितंबर का BRICS Summit केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक क्षमता, वैश्विक नेतृत्व और सुरक्षा व्यवस्था की भी बड़ी परीक्षा है।
दुनिया की निगाहें अब दिल्ली पर हैं, जहां एक ही मंच पर कई शक्तिशाली देशों के नेता भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और सहयोग की दिशा पर चर्चा करेंगे।**

