ज्योतिष क्या है ? ज्योतिष का मुख्य आधार है काल (समय) काल की गणना से ही ज्योतिष प्रारम्भ होता है। और यह काल चक्र ही है। जिसमें संसार गतिमान है। इसी काल (समय) का वर्णन भगवान ने गीता में करते हुए कहा कि “कालः कलयतामहम्” (अध्याय-10/श्लोक-30) अर्थात् “गणना करने वालों में मैं काल हूँ’ और सर्व विदित है कि काल (समय) का निर्धारण (गणना) सूर्य से होती है, और इसी सूर्य को भी भगवान ने अपना स्वरुप बताया है इस प्रकार – “ज्योतिषां रविरंशुमान् 10/21 इतना ही नहीं दो अयन होते हैं उत्तरायन और दक्षिणायन इनका भी गीता में भगवान…
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