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Home»धर्म»बड़े मंगल की व्रतकथा
धर्म

बड़े मंगल की व्रतकथा

Updated:June 11, 2024
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ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी की भेंट हुई थी। अतः ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार पर बुढवा मंगल मनाया जाता है। हनुमान जी को संकट मोचन बाबा के नाम से भी जाना जाता है तथा उनके बाल रुप को लोग बालाजी सरकार नाम से लोग पूजते हैं। संकट मोचन बाबा अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं एवं सब हमेशा उनकी रक्षा करते हैं।

बड़े मंगल पर राम परिवार संग हनुमान जी की पूजा करने से साधक के सभी बिगड़े काम बन जाते हैं।

बड़े मंगल की व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। एक गांव में ब्राह्मण दंपति रहता है। दंपति को कोई संतान नहीं थी। इसके लिए पति और पत्नी दोनों चिंतित और दुखी रहते थे। ब्राह्मण की पत्नी हनुमान जी की भक्त थी। एक दिन पत्नी से सलाह लेकर ब्राह्मण वन की ओर प्रस्थान कर गए। वन में ब्राह्मण व्यक्ति हनुमान जी की तपस्या करने लगे। वहीं, ब्राह्मण की धर्मपत्नी घर पर हनुमान जी की पूजा करती थी। साथ ही मंगलवार के दिन व्रत उपवास भी रखती थी। इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करती थी और हनुमान जी को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करती थी।

एक बार की बात है, जब ब्राह्मण की धर्मपत्नी हनुमान जी को भोग लगाना भूल गई। इसके बाद महिला को अहसास हुआ कि उससे बड़ी गलती हुई है। उसी समय ब्राह्मण महिला ने प्रण किया कि अगले मंगलवार को भोग लगाने के बाद भी भोजन ग्रहण करूंगी। तब तक अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करूंगी। लगातार पांच दिनों तक भूखे रहने के चलते महिला की सेहत बिगड़ गई। मंगलवार के दिन महिला मूर्छित हो गई। यह देख हनुमान जी को दया आ गई। उस समय हनुमान जी ने दर्शन देकर सारी मनोकामना पूर्ण की।

कालांतर में ब्राह्मण महिला को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। महिला ने अपने पुत्र का नाम मंगल रखा। कुछ समय के बाद ब्राह्मण घर लौटा तो मंगल को देखा। अनजाने बच्चे को घर में देख ब्राह्मण अपनी धर्मपत्नी से बोला- ये बालक कौन है? ब्राह्मण की पत्नी ने कहा कि ये मंगल है और अपना पुत्र है। हालांकि, ब्राह्मण को विश्वास नहीं हुआ। उसके बाद ब्राह्मण ने एक दिन मौका पाकर बालक मंगल को कुएं में धकेल दिया। ब्राह्मण को लगा कि मंगल अब बच नहीं पाएगा। इसके बाद ब्राह्मण घर लौट आया।

उस समय मंगल अपने पिता के पीछे खड़ा था। वह आवाज देकर बोला- मां मैं यही हूं। बालक मंगल को देख ब्राह्मण सकते में आ गया। उस रात ब्राह्मण को नींद नहीं आ रही थी। अपने किए पर दुख हो रहा था। उस समय ब्राह्मण ने हनुमान जी से क्षमा याचना की। तब हनुमान जी ने सपने में आकर ब्राह्मण को बोला- मेरे आशीर्वाद से तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। यह जान ब्राह्मण बेहद प्रसन्न हुआ। इसके बाद ब्राह्मण दंपति हर मंगलवार को श्रद्धा भाव से हनुमान जी की पूजा करने लगे। साथ ही मंगलवार का व्रत रखने लगे।

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