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Home»धर्म»मोक्षदा एकादशी — मोक्ष का पवित्र द्वार
धर्म

मोक्षदा एकादशी — मोक्ष का पवित्र द्वार

By Archana Dwivedi
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मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत मनुष्य को न केवल इस जन्म के पापों से मुक्त करता है, बल्कि उसके पूर्वजों की आत्मा को भी शांति और मोक्ष प्रदान करता है।

“मोक्षदा” का अर्थ ही होता है — मोक्ष प्रदान करने वाली। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन उनका स्मरण, पूजन और कथा-पाठ व्यक्ति के जीवन को पवित्र, शांत और दिव्य बना देता है।

2025 में मुहूर्त व पारण समय

एकादशी तिथि आरंभ: 30 नवंबर 2025, रात 9:29 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 1 दिसंबर 2025, शाम 7:01 बजे

व्रत-पारण (पारण) के लिए शुभ समय (दुवितीय तिथि – द्वादशी पर): 2 दिसंबर 2025, सुबह 6:57 बजे से 9:03 बजे तक

मोक्षदा एकादशी का महत्व

कहा जाता है कि जो मनुष्य इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है —

उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है

उसे आत्मिक शांति की अनुभूति होती है

उसके पूर्वजों की आत्मा को सद्गति मिलती है

उसके जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता आती है

यही कारण है कि इस एकादशी को सबसे फलदायी एकादशियों में गिना गया है।

पूजा-विधान (पूजन की विधि)

मोक्षदा एकादशी की पूजा बहुत सरल और भावपूर्ण होती है :

1. प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. घर के मंदिर या किसी शांत स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. तुलसी पत्र, पीले फूल, धूप, दीप और फल अर्पित करें।

4. हाथ जोड़कर संकल्प लें —
“हे नारायण, मैं यह व्रत श्रद्धा-पूर्वक आपके चरणों में समर्पित करता/करती हूँ, कृपा कर मेरा और मेरे पूर्वजों का कल्याण करें।”

5. भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें —
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

6. फिर मोक्षदा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में आरती करें।

रात में जागरण, भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

व्रत के नियम

पूरे दिन अन्न ग्रहण नहीं किया जाता (कुछ लोग फलाहार करते हैं)

मन, वचन और कर्म से शुद्धता का पालन किया जाता है

किसी की निंदा, झगड़ा या गलत काम करने से बचा जाता है

मन को भगवान विष्णु में लगाए रखा जाता है

व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में स्नान के बाद भगवान को भोग लगाकर और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराकर किया जाता है। इसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए।

मोक्षदा एकादशी की कथा

बहुत समय पहले वैखानस् नामक एक धर्मप्रिय राजा राज्य करता था। उसकी प्रजा सुखी और संतुष्ट थी, परंतु उसका पुत्र बहुत गलत मार्ग पर चल पड़ा। उसके पाप और कुकर्मों के कारण उसे मृत्यु के बाद भयंकर कष्ट सहने पड़े।

एक दिन राजा को एक संत मिले, जिन्होंने राजा को मोक्षदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत किया और अपने पुत्र की आत्मा की मुक्ति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की।

भगवान विष्णु राजा की भक्ति से प्रसन्न हुए और उसके पुत्र तथा पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया। तभी से यह एकादशी “मोक्षदा” कहलाने लगी — जो मोक्ष का मार्ग दिखाती है।

इस व्रत का फल

मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से—

व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है

परिवार में सुख-शांति आती है

मन को शांति और आत्मा को दिव्यता मिलती है

पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है

यह व्रत जीवन को शुद्ध, सुंदर और सार्थक बना देता है।

निष्कर्ष

मोक्षदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मा की मुक्ति और शांति का पर्व है। यह हमें भक्ति, संयम और पुण्य के मार्ग पर आगे बढ़ना सिखाता है।

जो भी यह व्रत श्रद्धा से करता है, उसके जीवन में स्वयं भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है 

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Archana Dwivedi
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I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

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