भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे में न्यायपालिका की भूमिका सर्वोच्च है, और इस स्तंभ का नेतृत्व करता है — भारत का मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI)। यह पद न केवल न्याय की व्यवस्था का शीर्ष बिंदु है, बल्कि संविधान की रक्षा, न्यायिक स्वतंत्रता और जनता के अधिकारों की सुरक्षा का दायित्व भी निभाता है। आइए समझते हैं कि CJI कौन होता है, कैसे नियुक्त किया जाता है, उसके अधिकार क्या होते हैं और अब तक इस पद पर कौन-कौन आसीन हो चुके हैं।
पद का स्वरूप: CJI कौन होता है?
भारत के सुप्रीम कोर्ट का प्रमुख न्यायाधीश ही Chief Justice of India कहलाता है।
यह पद भारत की संपूर्ण न्यायिक व्यवस्था का सर्वोच्च प्रशासनिक और नैतिक नेतृत्व करता है।
Chief Justice of India
सुप्रीम कोर्ट का presiding judge होता है,
संविधान पीठों का गठन करता है,
महत्वपूर्ण मामलों के लिए बेंच बनाता है,
न्यायपालिका के कार्य और समय प्रबंधन का संचालन करता है।
संवैधानिक आधार: कौन-से अनुच्छेद से यह पद स्थापित है?
अनुच्छेद 124(1) — भारत में एक सुप्रीम कोर्ट होगा, जिसमें एक “Chief Justice of India” होगा।
अनुच्छेद 126 — यदि CJI अनुपस्थित, अक्षम या पद रिक्त हो, तो एक Acting Chief Justice नियुक्त किया जा सकता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि संविधान में CJI की नियुक्ति की विस्तृत प्रक्रिया नहीं लिखी गई है, केवल पद का उल्लेख है।
नियुक्ति की प्रक्रिया: CJI कैसे बनता है?
भारत में CJI की नियुक्ति परंपरा और Memorandum of Procedure (MoP) के आधार पर होती है।
1. वरिष्ठता सिद्धांत (Seniority Principle):
सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश ही अगला CJI बनता है।
2. सिफारिश प्रक्रिया:
कार्यरत CJI स्वयं अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश करते हैं।
सिफारिश कानून मंत्री → प्रधानमंत्री → राष्ट्रपति को भेजी जाती है।
राष्ट्रपति औपचारिक रूप से CJI नियुक्त करता है।
3. वरिष्ठता कैसे तय होती है?
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की तारीख से।
यदि दो न्यायाधीश एक ही दिन नियुक्त हों, तो जिसने पहले शपथ ली, वह वरिष्ठ।
यह पूरी प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए अत्यंत पारदर्शी ढंग से चलती है।
योग्यता (Eligibility)
किसी भी व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश (और आगे चलकर CJI) बनने के लिए निम्नलिखित में से किसी एक शर्त को पूरा करना आवश्यक है:
हाई कोर्ट में कम से कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश रह चुके हों, या
किसी हाई कोर्ट में 10 वर्ष तक वकालत कर चुके हों, या
राष्ट्रपति की दृष्टि में एक विशिष्ट विधिवेत्ता / जुरिस्ट हों।
साथ ही, वह व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए।
CJI के अधिकार और कर्तव्य
1. प्रशासनिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट की सभी पीठों का गठन करना।
न्यायाधीशों का roster तय करना — कौन-सा केस किस बेंच को मिलेगा।
न्यायालय की कार्यशैली, अवकाश, नियमावली और आंतरिक प्रबंधन तय करना।
2. न्यायिक अधिकार
संविधान पीठ (5-न्यायाधीश), 7-न्यायाधीश या 9-न्यायाधीश बेंच का गठन।
बड़े संवैधानिक मामलों पर अंतिम अधिकार।
3. राष्ट्रीय महत्व के अधिकार
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग/कोलेजियम में नेतृत्व।
राष्ट्रपति द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों पर सलाह (यदि मांगी जाए)।
कार्यकाल और सेवानिवृत्ति
सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की तरह, CJI की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित है।
कार्यकाल इस बात पर निर्भर करता है कि वे किस उम्र में CJI बने।
CJI दोबारा इस पद पर नियुक्त नहीं हो सकते।
अब तक कितने CJI हुए?
26 जनवरी 1950 से आज तक कुल 53 CJI हो चुके हैं।
भारत के पहले CJI न्यायमूर्ति H. J. Kania थे।
वर्तमान CJI (2025)

न्यायमूर्ति सुर्या कांत — भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश
उन्होंने 24 नवंबर 2025 को शपथ ली।
कुछ प्रमुख CJI और उनके योगदान (संक्षेप में)
M. Hidayatullah (1968–70) – संविधान विशेषज्ञ, बाद में भारत के उपराष्ट्रपति भी बने।
P. N. Bhagwati (1985–86) – PIL (जनहित याचिका) युग के पिता।
A. N. Ray (1973–77) – विवादास्पद नियुक्ति; वरिष्ठता परंपरा तोड़ी गई थी।
T. S. Thakur (2015–17) – न्यायालय की लंबित मामलों की समस्याओं पर कड़ा रुख।
N. V. Ramana (2021–22) – नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण निर्णय।
समापन: CJI क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में CJI का पद एक “संवैधानिक संरक्षक” का होता है।
वह:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करता है,
नागरिक अधिकारों का संरक्षक होता है,
सरकार, संसद और जनता — तीनों संतुलनों के बीच न्याय का मार्ग दिखाता है।
इस प्रकार CJI का पद केवल एक न्यायिक पद नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र का सबसे भरोसेमंद स्तंभ है।

