उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। इस बजट का कुल आकार लगभग ₹9.12 लाख करोड़ (₹9,12,000 करोड़ से अधिक) रखा गया है। यह राशि पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत अधिक है। सरकार का कहना है कि यह बजट प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, रोजगार बढ़ाने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बजट का आकार और उद्देश्य
इतनी बड़ी राशि के साथ प्रस्तुत यह बजट केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की योजना का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास को प्राथमिकता दी है। साथ ही महिला सशक्तिकरण और युवा कौशल विकास को भी विशेष महत्व दिया गया है।
किन क्षेत्रों पर किया गया अधिक खर्च?

बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा हिस्सा निर्धारित किया गया है, जिसमें स्कूलों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सुविधाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार की योजनाएँ शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की बात कही गई है।
कृषि क्षेत्र में सिंचाई, सोलर पंप और किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
सड़क, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास के लिए भी हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
क्या शामिल नहीं किया गया या कम दिखा?
हालांकि बजट का आकार बड़ा है, लेकिन कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठे हैं।
बेरोज़गारी पर स्पष्ट रणनीति की कमी – युवाओं के लिए रोजगार सृजन का जिक्र तो किया गया है, परंतु विस्तृत और ठोस रोडमैप स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।
छोटे किसानों के लिए सीधी आर्थिक राहत – कृषि क्षेत्र के लिए प्रावधान हैं, लेकिन सीमांत और छोटे किसानों के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता या कर्ज माफी जैसी बड़ी घोषणाएं नहीं की गईं।
महंगाई पर विशेष राहत का अभाव – आम जनता को राहत देने के लिए करों में बड़ी कटौती या नई सब्सिडी जैसी कोई बड़ी घोषणा नहीं दिखी।
पिछड़े क्षेत्रों के लिए अलग पैकेज – बुंदेलखंड या पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष, अलग से बड़े पैमाने का पैकेज स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।
वित्तीय अनुशासन
सरकार ने दावा किया है कि बजट का आकार बड़ा होने के बावजूद राजकोषीय घाटा नियंत्रित सीमा के भीतर रखा गया है। इसका उद्देश्य विकास और वित्तीय संतुलन के बीच तालमेल बनाए रखना है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश का यह बजट आकार की दृष्टि से ऐतिहासिक है और इसमें विकास के कई बड़े वादे किए गए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे पर जोर सकारात्मक संकेत देता है। हालांकि, बेरोज़गारी, महंगाई और छोटे किसानों की सीधी राहत जैसे मुद्दों पर अधिक स्पष्ट और ठोस योजनाओं की अपेक्षा बनी हुई है।

