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Home»Important days»राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National voters Day) 2022
Important days

राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National voters Day) 2022

Updated:February 19, 2022
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25 जनवरी 2022 : जाने मतदाता दिवस का उद्देश्य ,थीम व इसका महत्व

दोस्तों , हम आपको बता दें कि मतदान करना प्रति जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है क्योंकि हर एक वोट जरूरी होता है यह नई सरकार एवं लोकतंत्र के भाग्य का फैसला करता है मतदान का अधिकार देश के नागरिकों का एक कानूनी अधिकार है ।

National Voters Day 25 January 2022

National Votors Day (25 January 2022)

जैसा कि आपको सर्वविदित है कि प्रत्येक साल 25 जनवरी को भारत में मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का एक प्रमुख उद्देश्य है । हम आपको बता देना चाहते हैं कि मतदान करना प्रत्येक नागरिक का अपना एक कानूनी अधिकार माना जाता है।

मतदाता दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय मतदाता दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना है ताकि वे लोकतंत्र में अपने प्रतिनिधि का चुनाव स्वयं कर सके क्योंकि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही सरकार में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रत्येक व्यक्ति का मतदान एक नई सरकार एवं लोकतंत्र के भाग्य का फैसला करता है मतदाता दिवस की शुरुआत भारत में मतदान को लेकर लोगों के कम होते रुझान को देखते हुए की गई । राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन कई प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है ताकि लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

जाने इसके लिए कौन से कार्यक्रमों का होता है आयोजन :

मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन विभिन्न ने भाषण, प्रतियोगिता, अभियान एवं नए मतदाताओं को वोटर आईडी वितरण, मतदाताओं की फोटोग्राफी ,संबंधी कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं ।

वोटर्स डे को मनाने के पीछे प्रमुख उद्देश्य लोगों को वोट के प्रति जागरूक करना है ताकि वे अपने अधिकारों का सही प्रयोग करके अपने प्रतिनिधि का चुनाव कर और लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम(विषय):

25 जनवरी 2022 को आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जा रहा है इस वर्ष 2022 में राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम है – “मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनावी साक्षरता”

इस दिन नए मतदाताओं को वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे भी देश के विकास में सहयोग कर सके। हम आपको बता दें कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन ने मतदाताओं को वोटर कार्ड देकर सम्मानित भी किया जाता है राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को सूची में नाम जोड़ना मतदान करने के लिए भी जागरूक करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।

इस दिन में नए मतदाताओं को वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे भी देश के विकास में सहयोग कर सके। हम आपको बता दें कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन ने मतदाताओं को वोटर कार्ड देकर सम्मानित भी किया जाता है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को सूची में नाम जोड़ना मतदान करने के लिए भी जागरूक करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस क्यों मनाया जाता है

National voters day

भारत में 25 जनवरी 1950 को निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई पहली बार राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी 2011 को मनाया गया था। यह चुनाव आयोग का 61 वां स्थापना दिवस था ।

भारतीय चुनाव आयोग भारत में संघ और राज्य चुनाव कराने हेतु एक स्वायत्त संवैधानिक संगठन है । यह भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं के चुनाव एवं देश में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों का संचालन भी करता है परंतु राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग स्थानीय स्तर के चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं लेता है अर्थात स्थानीय चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होती है।

जाने इसका कारण व इतिहास

देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में निर्वाचन आयोग के रूप में स्थाई एवं स्वतंत्र निकाय का प्रावधान किया गया।

भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से 329 तक निर्वाचन आयोग तथा निर्वाचन से संबंधित सभी उपबंध किए गए हैं। भारतीय संविधान में निर्वाचन आयोग के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन किया गया है परंतु जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के द्वारा निर्वाचन आयोग की शक्तियों को विस्तारित किया गया।

चुनाव आयोग एक भारतीय संस्था है क्योंकि यह संसद स्तर राज्य विधानमंडल दोनों के चुनाव के लिए समान रूप से उत्तरदाई है कोई भी संस्था अखिल भारतीय संस्था कहलाती है जेवर केंद्र और राज्य स्तर पर समान रूप से कार्य करें परंतु राज्य में होने वाले पंचायत एवं एवं नगर निगम चुनाव से चुनाव आयोग का कोई संबंध नहीं होता है इसके लिए भारत के संविधान में अलग से राज्य निर्वाचन आयोग की व्यवस्था की गई है ।

निर्वाचन कराने का यह प्रावधान ब्रिटेन से लिया गया है

निर्वाचन आयोग की संरचना

निर्वाचन आयोग की एकल सदस्य निकाय है जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो अन्य सदस्य होते हैं ।सभी सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है ।

वर्ष 1989 तक चुनाव आयोग के एकल सदस्य संस्था थी लेकिन 1989 में इन संस्था को 3 सदस्यीय बनाया गया उन्हें अगले वर्ष से एक सदस्यीय बना दिया गया इसके बाद वर्ष 1993 में इसे पुनः तीन सदस्यीय कर दिया गया।

निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल अधिकतम 6 वर्ष या 65 वर्ष की उम्र तक( जो भी पहले हो) इस पद पर अपने पद पर बना रह सकता है। अन्य सदस्यों की कार्यकाल 6 वर्ष 62 वर्ष आयु निर्धारित की गई है कि किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं तथा उन्हें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है।

निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान

भारत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया उसी प्रकार से है जिस प्रकार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है अर्थात निर्वाचन आयुक्त को दुर्व्यवहार यह क्षमता के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत के संकल्प पारित करने के बाद राष्ट्रपति के द्वारा हटाया जा सकता है।

दोस्तों हम आपको बता दें कि भारत में निर्वाचन आयुक्त राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पर धारण नहीं करता है। राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से हटा नहीं सकता है।

मतदाता को मतदान करने के लिए आवश्यक शर्तें

  • भारत में मतदान करने के लिए आयु सीमा 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
  • 18 वर्ष का कोई भी भारतीय नागरिक सभी प्रकार के लोकतांत्रिक चुनावों में मतदान का अधिकार प्राप्त करता है चुनाव आयोग वोटर्स को एक पहचान पत्र प्रदान करते हैं, जिसको वोटर आईडी कार्ड  अर्थात मतदाता पहचान पत्र भी कहा जाता है ।
  • कोई भी व्यक्ति केवल तभी मतदान कर सकता है जब उसका नाम चुनावी लिस्ट में शामिल हो और वह 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हूं ।
  • अगर किसी वजह से उसका मतदाता सूची से उसका नाम हटा दिया जाता है तो मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र होने पर भी वह वोट नहीं डाल सकता
  • यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश का नागरिक बन जाता है तो भी वह भारत में मतदान का अधिकार खो देता है।
निर्वाचन आयुक्त

निर्वाचन आयोग के कार्य:

  • निर्वाचन आयोग राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण करता है चुनाव चिन्ह आवंटित कर आता है राजनीतिक दलों को के लिए के लिए निर्वाचित अतिथियों तथा समय सारणी को भी निर्धारित करता है साथ ही नामांकन पत्रों का परीक्षण करता है।
  • निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा राज्यसभा एवं विधानसभा के प्रत्येक चुनाव में मध्यावधि चुनाव से पूर्व मतदाता सूचियां तैयार करवाई जाती है।
  • निर्वाचन आयोग का महत्वपूर्ण कार्य चुनाव क्षेत्र का परिसीमन करना है। परिसीमन आयोग अधिनियम 1952 में यह प्रावधान है कि 10 वर्ष बाद होने वाली प्रत्येक जनगणना के उपरांत निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82 में वर्णित है।
  • यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के पंजीकरण आधार रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी की गई है राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह का आवंटन निर्वाचन आयोग द्वारा कराया जाता है।
  • निर्वाचन आयोग एक अर्ध न्यायिक संस्था है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 103 के अंतर्गत राष्ट्रपति संसद के सदस्यों की योग्यताओं के संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श कर सकता है वही अनुच्छेद 192 के अंतर्गत राज्य विधान मंडल के सदस्यों के संबंध में परामर्श करने का यह अधिकार राज्य के राज्यपाल को दिया ।
  • निर्वाचन आयोग की पर संवैधानिक निकाय होने के कारण सिविल न्यायालय की शक्तियां भी है। भारतीय चुनाव आयोग भारतीय सीमा में किसी भी व्यक्ति को समन जारी कर सकता है। साथ ही सरकार के किसी भी विभाग से संबंधित आवश्यक फाइलों को देख सकता है।
  • इसके अतिरिक्त आयोग के पास न्यायिक शक्तियां भी हैं वह निर्वाचन से संबंधित विवादों का निपटारा करता है तथा उम्मीदवारों तथा दलों पर कार्यवाही करने हेतु राज्यपाल या राष्ट्रपति से सिफारिश भी कर सकता है।
  • इस प्रकार से निर्वाचन आयोग के पास तीन प्रमुख शक्तियां हैं- प्रशासनिक कार्य ,सलाहकार कार्य व अर्ध न्यायिक कार्य संबंधी शक्तियां।
  • चुनाव आयोग चुनाव के समय राजनीतिक दलों एवं एवं बारू के लिए आचार संहिता (Code of conduct) तैयार करता है निर्वाचन के समय राजनीतिक दलों की नीतियों के प्रचार के लिए रेडियो और टेलीविजन कार्यक्रम की सूची के द्वारा निर्मित की जाती है।
  • उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले भी की राशि निश्चित करना।
  • राजनीतिकदलों को मान्यता देना इसका एक प्रमुख कार्य है।
निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा

वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा है

राष्ट्रीय चुनाव प्रणाली में वर्तमान में VVPAT ( Voter Varifiable Paper Aduit Trial ) व EVM (Electronic voting machine) जैसे उपकरण का प्रयोग किया जा रहा है।

कौन सी होती है वह स्याही जिसका प्रयोग चुनाव मतदान के दौरान किया जाता है:

चुनाव में मतदाता की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही सिल्वर नाइट्रेट(AgNo3) होती है यह प्रकाश के संपर्क में आने पर त्वचा पर निशान छोड़ देती है।

सिल्वर नाइट्रेट त्वचा पर उपस्थित नमक से अभिक्रिया करके सिल्वर क्लोराइड का निर्माण करता है जो जल में अविलेय अर्थात घुलनशील होती है।

उम्मीद करते हैं दोस्तों, मतदाता दिवस से संबंधित जानकारी आपको पसंद आई होगी। ऐसी और भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए जुड़े रहिए हमारी वेबसाइट IndiaMitra के साथ।

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