वर्ष 2026 भारत के लिए वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। यह भारत की चौथी BRICS Chairship है और इसके दौरान देश का लक्ष्य विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना तथा वैश्विक सहयोग को नई दिशा देना है।
क्या है BRICS?
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समूह है। इसके मूल सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे। समय के साथ समूह का विस्तार हुआ है और अब इसमें कई नए सदस्य भी शामिल हैं।
BRICS का महत्व केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। आज यह व्यापार, तकनीक, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और वैश्विक शासन जैसे अनेक मुद्दों पर सहयोग का मंच बन चुका है।
भारत की BRICS 2026 की प्राथमिकताएं
भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” की व्यापक सोच रखी है। इसका उद्देश्य ऐसी साझेदारी को बढ़ावा देना है जो लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर आधारित हो।
भारत की प्राथमिकताओं में विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना, आर्थिक अवसरों का विस्तार करना और वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान तलाशना शामिल है।
शिक्षा और युवाओं पर भी जोर
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान शिक्षा और कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। अगस्त 2026 में भुवनेश्वर में BRICS Education Ministers’ Meeting आयोजित हुई, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा, skill development, research, start-ups और academic qualifications की mutual recognition जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इससे स्पष्ट है कि BRICS अब केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा और युवा विकास जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक दक्षिण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?
भारत लंबे समय से विकासशील देशों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाने की बात करता रहा है। BRICS के माध्यम से भारत Global South की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर सकता है।
व्यापार, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त, तकनीकी विकास और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, BRICS के विस्तार के साथ-साथ अलग-अलग देशों के हितों में संतुलन बनाना भारत के सामने एक बड़ी चुनौती भी है।
आगे क्या?
2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान कई ministerial और sectoral meetings आयोजित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, तकनीक, व्यापार, सुरक्षा, जलवायु और सतत विकास जैसे विषय शामिल हैं। अगस्त में मुंबई में BRICS Friendship Cities Conclave भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें urban development, climate resilience और AI-based governance जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
निष्कर्ष
भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। यह भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की अध्यक्षता नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने, विकास और नवाचार को बढ़ावा देने तथा बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने का अवसर है।
आने वाले महीनों में BRICS के माध्यम से भारत किस तरह ठोस और व्यावहारिक परिणाम सामने लाता है, यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

