बसंत पंचमी का पर्व विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। इस दिन पूजा करने के पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक—तीनों कारण हैं।
बसंत पंचमी की पूजा माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को की जाती है।
1. माँ सरस्वती का अवतरण दिवस
धार्मिक मान्यता के अनुसार—
बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था।
सृष्टि में ज्ञान, वाणी और विवेक का संचार इसी दिन हुआ। इसलिए इस दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है।
2. विद्या और बुद्धि की प्राप्ति के लिए
माँ सरस्वती ज्ञान, स्मरण शक्ति, विवेक और रचनात्मकता की देवी हैं।
विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार और संगीत साधक
इस दिन पूजा कर बुद्धि व एकाग्रता की कामना करते हैं।
✍️3. शिक्षा का शुभारंभ (विद्यारंभ संस्कार)
इस दिन नई पढ़ाई शुरू करना,
बच्चों से पहला अक्षर लिखवाना,
नई किताबें, कलम, वाद्य यंत्र लेना
अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. बसंत ऋतु और सकारात्मक ऊर्जा
बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है।
प्रकृति में हरियाली, फूलों की बहार और नई ऊर्जा आती है।
पीला रंग सकारात्मकता, उमंग और ज्ञान का प्रतीक है।
5. कला, संगीत और सृजन के लिए
माँ सरस्वती वीणा, पुस्तक और हंस के साथ विराजमान होती हैं।
यह संकेत है कि—
वीणा → संगीत और कला
पुस्तक → ज्ञान
हंस → विवेक (अच्छे–बुरे का भेद)
बसंत पंचमी की पूजा करने का विशेष महत्व
बसंत पंचमी की पूजा इसलिए की जाती है ताकि—
जीवन में ज्ञान का प्रकाश आए
अज्ञान और आलस्य दूर हों
बच्चों व विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल बने
कला, संगीत और रचनात्मकता में उन्नति हो
“जहाँ ज्ञान है, वहाँ अंधकार नहीं रहता –
और माँ सरस्वती उसी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं।”
बसंत पंचमी पूजा कब करनी चाहिए?
माघ मास की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है।
पूजा सूर्योदय के बाद से दोपहर तक करना सबसे शुभ माना जाता है।
विशेष रूप से प्रातःकाल या अभिजीत मुहूर्त सर्वोत्तम होता है।
अगर किसी कारण से सुबह पूजा न हो पाए तो दोपहर से पहले अवश्य कर लें।
⏰ शुभ मुहूर्त (सामान्य नियम)
पंचमी तिथि में आने वाला दिन का समय
सूर्योदय से दोपहर 12–1 बजे तक
(स्थानीय पंचांग के अनुसार समय थोड़ा बदल सकता है)
सरस्वती पूजा की विधि (सरल विधान)
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
– पीले या सफेद वस्त्र सबसे शुभ माने जाते हैं।
पूजा स्थान की तैयारी
– साफ जगह पर पीला कपड़ा बिछाएँ।
– माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
कलश स्थापना (यदि करें तो)
– जल, आम के पत्ते, नारियल रखें।
माँ सरस्वती का आवाहन करें
– दीप जलाकर मन से प्रार्थना करें।
पूजन क्रम
गंगाजल से शुद्धि
कुमकुम / चंदन
अक्षत (चावल)
पुष्प अर्पित करें
धूप–दीप दिखाएँ
मंत्र जप / वंदना
सरस्वती वंदना
बसंत पंचमी के दिन पेट बच्चों को माता सरस्वती का पूजन एवं वंदन करनी चाहिए जैसे माता सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती तथा आपकी बुद्धि भी ठीक रहती है।
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिः
देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्यापहा॥

