केंद्रीय बजट 2026 में मोदी सरकार ने रेलवे को लेकर एक बड़ा और दूरगामी ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए देशभर में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की। सरकार का कहना है कि ये कॉरिडोर भारत की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी नई गति देंगे।
इन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का उद्देश्य प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक हब को तेज़, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा से जोड़ना है। सरकार ने इन्हें “ग्रोथ कॉरिडोर” बताया है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये होंगे प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
बजट में जिन प्रमुख रूट्स का ज़िक्र किया गया है, उनमें शामिल हैं—
1.मुंबई से पुणे
2.पुणे से हैदराबाद
3.हैदराबाद से बेंगलुरु
4.हैदराबाद से चेन्नई
5.चेन्नई से बेंगलुरु
6.दिल्ली से वाराणसी
7.वाराणसी से सिलिगुड़ी
इन रूट्स को इस तरह चुना गया है ताकि उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।
यात्रा समय में होगी बड़ी कमी
सरकार के अनुसार, इन हाई-स्पीड ट्रेनों के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
जहां अभी घंटों लगते हैं, वहीं भविष्य में वही दूरी कुछ ही घंटों या मिनटों में तय की जा सकेगी। इससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी और समय की बचत होगी।
अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा फायदा

इन रेल कॉरिडोर से सिर्फ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और निर्माण व संचालन के दौरान लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
रेलवे के आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस✨
बजट 2026 में रेलवे के लिए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय रेलवे को तकनीक, सुरक्षा और गति के मामले में वैश्विक स्तर का बनाया जाए। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इसी दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
भविष्य की ओर बढ़ता भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत को आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की ओर ले जाने वाला साबित हो सकता है।
अगर ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे होते हैं, तो भारत का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकता है।

