माता शैलपुत्री का स्वरूप
माता शैलपुत्री नवरात्रि के पहले दिन पूजी जाती हैं। ये पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं।
इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल होता है
बाएं हाथ में कमल पुष्प
इनकी सवारी बैल (नंदी) है
ये शक्ति, स्थिरता और दृढ़ता की प्रतीक मानी जाती हैं।
पूजा करने का तरीका
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें
माता की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
गंगाजल से शुद्धि करें
फूल, रोली, चावल अर्पित करें
दीपक और धूप जलाएं
माता को भोग लगाएं
घी (शुद्ध देसी घी)
माना जाता है कि घी का भोग लगाने से स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है।
मंत्र (जाप करने के लिए)
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
108 बार जप करना शुभ माना जाता है।
कौन से फूल पसंद हैं
लाल गुलाब 🌹
कमल 🌷
पसंदीदा रंग
लाल रंग
इस दिन लाल कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
कौन सा भोग लगता है
杖 आरती (छोटी सी)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥……..
माता को प्रसन्न कैसे करें
✅सच्चे मन से पूजा करें
✅नियम और संयम रखें
✅गरीबों की मदद करें
✅क्रोध और अहंकार से दूर रहें
निष्कर्ष
माता शैलपुत्री की पूजा से जीवन में शक्ति, साहस और स्थिरता आती है। जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, माता उसकी सभी बाधाएं दूर करती हैं।

