माता कुष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं और इनके आठ भुजाएँ होती हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा आदि होते हैं। माँ का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और प्रकाशमय होता है।
माता कुष्मांडा की पूजन की विधि
* प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* पूजा स्थल को साफ करके माता कुष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें।
* फूल, रोली, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
* धूप-दीप जलाकर माता का ध्यान करें।
* भोग अर्पित करें और अंत में आरती करें।
माता कुष्मांडा को प्रसन्न करने का मंत्र
” सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे॥”
सरल मंत्र:
“ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः”
杖 आरती कैसे करें
पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर माता की आरती करें। आरती करते समय मन को एकाग्र रखें और माँ से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। आरती के बाद प्रसाद सभी में बाँटें।
माता कुष्मांडा का प्रिय भोग

माता कुष्मांडा को कद्दू (कुष्मांड) से बने व्यंजन बहुत प्रिय हैं। इसके अलावा मालपुआ या अन्य मीठे पकवान भी अर्पित किए जा सकते हैं।
प्रिय रंग
माता कुष्मांडा को हरा (ग्रीन) रंग प्रिय है। इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
✨ विशेष महत्व
माता कुष्मांडा की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, शक्ति और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। माँ अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और निरोगी जीवन का आशीर्वाद देती हैं।

