नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जैसे ही मार्शल आर्ट गुरु के. पजानिवेल सम्मान ग्रहण करने मंच पर पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi को दंडवत प्रणाम किया। उनके इस विनम्र और संस्कारपूर्ण व्यवहार ने समारोह में मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।
सोशल मीडिया पर इस पल का वीडियो तेजी से वायरल हो गया। लोग इसे भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा और विनम्रता का प्रतीक बताते हुए सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि सम्मान पाने के बाद भी इतनी सादगी और संस्कार बहुत कम देखने को मिलते हैं।
कौन हैं के. पजानिवेल?
के. पजानिवेल देश के जाने-माने मार्शल आर्ट गुरु हैं। उन्होंने वर्षों तक भारतीय पारंपरिक युद्ध कलाओं और मार्शल आर्ट के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए काम किया है। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान के लिए चुना। इससे पहले भी उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।
पद्मश्री सम्मान से बढ़ी चर्चा
हालांकि पद्मश्री सम्मान अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस बार के. पजानिवेल अपने सम्मान से ज्यादा अपने व्यवहार और संस्कारों को लेकर चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री को दंडवत प्रणाम करने का उनका तरीका लोगों को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ा संदेश देता नजर आया।
राष्ट्रपति भवन में हुआ भव्य समारोह
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति और कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल हैं।
पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े अवॉर्ड
इससे पहले, के. पजानिवेल को 2023 में मार्शल आर्ट्स के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके अन्य सम्मानों में 2012 में पुडुचेरी सरकार की ओर से दिया गया कलाइमामणि पुरस्कार, 2004 में नेहरू युवा केंद्र द्वारा दिया गया सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार और 2002 में दिया गया सिलंबम अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज के दौर में जहां सफलता के साथ अक्सर अहंकार जुड़ जाता है, वहीं के. पजानिवेल का यह व्यवहार युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आया है। उन्होंने दिखाया कि ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद भी विनम्रता, सम्मान और संस्कार ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होते हैं।
निष्कर्ष
पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने वाले के. पजानिवेल ने अपने एक छोटे से कदम से करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया। उनका दंडवत प्रणाम केवल एक अभिवादन नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, सम्मान और विनम्रता का जीवंत उदाहरण था। यही कारण है कि आज पूरा देश उनके इस भाव को सराह रहा है और उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहा है।

