बारिश का मौसम था। एक छोटा लड़का रोज़ स्कूल जाते समय कीचड़ भरे रास्ते से गुजरता था। उसके जूते गंदे हो जाते, कपड़ों पर छींटे पड़ जाते और लोग उसका मज़ाक उड़ाते।
एक दिन उसने अपने शिक्षक से पूछा, “सर, लोग मुझे देखकर हँसते क्यों हैं?”
शिक्षक मुस्कुराए और बोले, “बेटा, बारिश यह नहीं देखती कि कौन अमीर है और कौन गरीब। वह सब पर बराबर बरसती है। फर्क सिर्फ़ इतना होता है कि कोई बारिश को अपनी परेशानी बना लेता है, और कोई उसी बारिश में आगे बढ़ना सीख लेता है।”
उस दिन के बाद लड़के ने शिकायत करना छोड़ दिया। वह हर दिन मेहनत करता रहा। समय बीतता गया। वही लड़का पढ़-लिखकर एक सफल अधिकारी बन गया।
एक समारोह में उसने कहा, “मेरी सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं था। उस रास्ते पर कीचड़ भी था, बारिश भी थी और लोगों की बातें भी थीं। लेकिन मैंने एक बात सीख ली—रास्ते के निशानों से नहीं, अपने कर्मों से पहचान बनती है।”
सीख:
जीवन में कठिनाइयाँ आना तय है, लेकिन हार मान लेना तय नहीं है। परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, यदि आपका हौसला और मेहनत कायम है, तो एक दिन आपकी पहचान आपके संघर्ष से बनेगी, न कि आपकी परेशानियों से।

