जीवन में सफलता का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। कई बार असफलताएं ही हमें आगे बढ़ने की सबसे बड़ी सीख देती हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण हैं IIT मद्रास के निदेशक वी कामकोटी, जिन्होंने साबित कर दिया कि एक परीक्षा में असफल होना जीवन की हार नहीं है।
वी कामकोटी ने अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा करते हुए बताया कि जिस JEE परीक्षा में वे कभी सफल नहीं हो पाए थे, बाद में उसी परीक्षा के चेयरमैन बनने का गौरव उन्हें मिला। आज वे देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक IIT मद्रास का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन को केवल अंकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं समझना चाहिए। बच्चों और युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है। यदि हम इस सोच को अपनाएं, तो निराशा और हताशा से बच सकते हैं।
IIT मद्रास की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए अपने अनुभव में वी कामकोटी ने कहा कि वास्तव में ‘असफलता’ जैसी कोई चीज नहीं होती। हर असफल प्रयास हमें कुछ नया सिखाता है और भविष्य के लिए तैयार करता है।
उन्होंने भारत रत्न और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रसिद्ध विचार का भी उल्लेख किया। डॉ. कलाम कहा करते थे कि FAIL का अर्थ है — First Attempt In Learning ( एपीजे अब्दुल कलाम का वाक्य ) यानी “सीखने का पहला प्रयास”। यह सोच हमें बताती है कि किसी भी असफलता को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
वी कामकोटी की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो किसी परीक्षा या परिणाम में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं पा सके। उनका सफर यह संदेश देता है कि मेहनत, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी मंजिल हासिल कर सकता है।
JEE में असफल हुए, फिर उसी परीक्षा के चेयरमैन बने; IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी की प्रेरक कहानी
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