नई दिल्ली 2026 की बात की है। यह 12–13 सितंबर 2026 को हो रहा है और इस बार भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। आधिकारिक थीम है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास।
🇮🇳 BRICS सम्मेलन: दुनिया को नई दिशा देने की कोशिश
नई दिल्ली में हो रहा 18वाँ BRICS शिखर सम्मेलन केवल नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने का प्रयास बनकर सामने आया है। सम्मेलन में व्यापार, वैश्विक शासन, AI, ऊर्जा, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय शांति और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना तो कर रहा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है। उन्होंने UN Security Council सहित वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
🤝 किन मुद्दों पर बनी सहमति?
BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र को स्वीकार किया। इसमें प्रमुख रूप से—
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक।
युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से करने पर जोर।
वैश्विक व्यापार में अनुचित टैरिफ और आर्थिक बाधाओं को लेकर चिंता।
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और तेज सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देना।
AI के सुरक्षित, समावेशी और ऊर्जा-कुशल विकास तथा वैश्विक AI शासन पर सहयोग।
ऊर्जा सुरक्षा, आपदा-रोधक क्षमता और टिकाऊ विकास को मजबूत करना।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समय चर्चा नई साझा BRICS मुद्रा बनाने से ज्यादा स्थानीय मुद्राओं में भुगतान और बेहतर cross-border payment systems पर केंद्रित रही।
🌏 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
भारत ने इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णयों में अधिक प्रतिनिधित्व और प्रभाव मिलना चाहिए। साथ ही भारत ने AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और Industry 4.0 जैसे क्षेत्रों में कई पहल आगे बढ़ाईं।
एक लाइन में:
नई दिल्ली BRICS सम्मेलन का मूल संदेश है—आर्थिक सहयोग बढ़ाना, वैश्विक संस्थाओं में सुधार लाना और ग्लोबल साउथ को निर्णय लेने में अधिक मजबूत आवाज देना।

