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Home»Important days»जाने कौन थे संत रविदास, क्यों दिया जाता है इस दिन अवकाश
Important days

जाने कौन थे संत रविदास, क्यों दिया जाता है इस दिन अवकाश

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प्रत्येक वर्ष माघ पूर्णिमा को रविदास जयंती के रूप में मनाया जाता हैं इसके उपलक्ष्य में विद्यालयों में अवकाश रहता है या पहले उत्तर प्रदेश में मनाया जाता था परंतु अब दिल्ली यानी केंद्र में भी इस दिन विद्यालयों में अवकाश दिया जाने लगा। इस दिल संत रविदास का जन्म हुआ था। वर्ष 2025 में रविदास जयंती 12 फरवरी को पड़ी है जबकि बस 2020 में यह 9 फरवरी को पड़ी थी।

संत रविदास का जीवन

उनका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में मुगलों का शासन था चारों ओर अत्याचार, गरीबी, भ्रष्टाचार व अशिक्षा का बोलबाला था। उस समय मुस्लिम शासकों द्वारा प्रयास किया जाता था कि अधिकांश हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया जाए। संत रविदास की ख्याति लगातार बढ़ रही थी जिसके चलते उनके लाखों भक्त थे जिनमें हर जाति के लोग शामिल थे। यह सब देखकर एक परिद्ध मुस्लिम ‘सदना पीर’ उनको मुसलमान बनाने आया था। उसका सोचना था कि यदि रविदास मुसलमान बन जाते हैं तो उनके लाखों भक्त भी मुस्लिम हो जाएंगे। ऐसा सोचकर उनपर हर प्रकार से दबाव बनाया गया था लेकिन संत रविदास तो संत थे उन्हें किसी हिन्दू या मुस्लिम से नहीं मानवता से मतलब था।

कहते हैं कि स्वामी रामानंदाचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं। संत रविदास उनके शिष्य थे। संत रविदास तो संत कबीर के समकालीन व गुरूभाई माने जाते हैं। स्वयं कबीरदास जी ने ‘संतन में रविदास’ कहकर इन्हें मान्यता दी है। राजस्थान की कृष्णभक्त कवयित्री मीराबाई उनकी शिष्या थीं। यह भी कहा जाता है कि चित्तौड़ के राणा सांगा की पत्नी झाली रानी उनकी शिष्या बनीं थीं। वहीं चित्तौड़ में संत रविदास की छतरी बनी हुई है। मान्यता है कि वे वहीं से स्वर्गारोहण कर गए थे। हालांकि इसका कोई आधिकारिक विवरण नहीं है लेकिन कहते हैं कि वाराणसी में 1540 ईस्वी में उन्होंने देह छोड़ दी थी।

रविदास जयंती का महत्व

रविदास जयंती, रविदास जी के जन्म का प्रतीक है। रविदास जी जाति प्रथा के उन्मूलन में प्रयास करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भक्ति आंदोलन में भी योगदान दिया है, और कबीर जी के अच्छे दोस्त के रूप में पहचाने जाते हैं। रैदास पंथ का पालन करने वाले लोगों में रविदास जयंती का एक विशेष महत्व है, इसमे न केवल रविदास जी का अनुसरण करने वाले लोग, बल्कि अन्य लोग जो किसी भी तरह से रविदास जी का सम्मान करते हैं

संत रविदास का मठ

वाराणसी में संत रविदास का भव्य मंदिर और मठ है। जहां सभी जाति के लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। वाराणसी में श्री गुरु रविदास पार्क है जो नगवा में उनके यादगार के रुप में बनाया गया है जो उनके नाम पर ‘गुरु रविदास स्मारक और पार्क’ बना है।

संत रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को 1376 ईस्वी को हुआ था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के गोबर्धनपुर गांव में हुआ था। उनकी माता का नाम कर्मा देवी (कलसा) तथा पिता का नाम संतोख दास (रग्घु) था। उनके दादा का नाम श्री कालूराम जी, दादी का नाम श्रीमती लखपती जी, पत्नी का नाम श्रीमती लोनाजी और पुत्र का नाम श्रीविजय दास जी है।

संत रविदास की कुछ रचनाएं

  • प्रभु जी तुम चंदन हम पानी
  • प्रभु जी तुम संगति सरन तिहारी
  • परचै राम रमै जै कोइ
  • अब मैं हार्यौ रे भाई
  • गाइ गाइ अब का कहि गाऊँ
  • राम जन हूँ उंन भगत कहाऊँ
  • अब मोरी बूड़ी रे भाई
  • तेरा जन काहे कौं बोलै
  • भाई रे भ्रम भगति सुजांनि
  • त्यूँ तुम्ह कारनि केसवे
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