भारत सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए “वंदे मातरम्” गीत के सभी छह छंदों को आधिकारिक कार्यक्रमों में गाने का निर्णय लिया है। यह फैसला देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। पहले सामान्यतः “वंदे मातरम्” के केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन अब सरकार ने इसके सभी छह छंदों को गाने पर जोर दिया है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के पूरे 6 छंद वाले 3 मिनट 6 सेकंड वाले संस्करण को कई अवसर पर बजाना अनिवार्य कर दिया है। इसमें मां दुर्गा सहित तीन देवियों का उल्लेख है। अब तक वंदे मातरम गीत के 6 छंदों में से केवल एक छंद ही गया जाता था।
“वंदे मातरम्” भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे महान लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बांग्ला भाषा में लिखा था। यह गीत भारत माता की महिमा, सुंदरता और शक्ति का वर्णन करता है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और लोगों में देशप्रेम की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार के नए निर्देश के अनुसार, अब सरकारी समारोहों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में “वंदे मातरम्” के सभी छह छंद गाए या बजाए जाएंगे। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने राष्ट्रीय गीत के पूर्ण स्वरूप से परिचित कराना और उनमें देशभक्ति की भावना को और मजबूत करना है। यह कदम राष्ट्रीय एकता, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

इस निर्णय से विद्यार्थियों और नागरिकों को अपने राष्ट्रीय गीत के महत्व को समझने और उससे जुड़ने का अवसर मिलेगा। “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। सभी छह छंदों का गायन भारत की समृद्ध परंपरा और राष्ट्र के प्रति प्रेम को और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा।

