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Home»Indain history facts»लाल किले पर पहला तिरंगा – 15 अगस्त 1947 की वह सुबह जब भारत ने सदियों बाद अपनी आज़ादी का सूरज देखा
Indain history facts

लाल किले पर पहला तिरंगा – 15 अगस्त 1947 की वह सुबह जब भारत ने सदियों बाद अपनी आज़ादी का सूरज देखा

Updated:May 31, 2026
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14 अगस्त 1947 की आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, भारत एक नए जीवन और स्वतंत्रता के साथ जाग रहा था। पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (Tryst with Destiny) ने करोड़ों भारतीयों की आँखों में आंसू और दिलों में उम्मीद भर दी थी। लेकिन आज़ादी का वह सबसे पहला और जीवंत प्रतीक देखना अभी बाकी था—लाल किले की प्राचीर पर भारत के अपने तिरंगे का लहराना। Indiamitra के इस लेख में हम बात करेंगे 15 अगस्त 1947 की उस ऐतिहासिक सुबह के पूरे घटनाक्रम की।

1. 15 अगस्त 1947 की सुबह: जब दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा

आज़ादी की सुबह दिल्ली के आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे। हज़ारों-लाखों लोग अपने घरों से निकलकर ऐतिहासिक लाल किले और रायसीना हिल की तरफ बढ़ रहे थे।
उत्साह का माहौल: लोगों के चेहरों पर सदियों की गुलामी की बेड़ियां टूटने की ख़ुशी साफ देखी जा सकती थी। हर कोई उस पल का गवाह बनना चाहता था जब यूनियन जैक (ब्रिटिश झंडा) हमेशा के लिए नीचे आएगा और हमारा प्यारा तिरंगा शान से हवा में लहराएगा।

2. लाल किले की प्राचीर और पहला ध्वजारोहण

सुबह के ठीक 8:30 बजे, स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू लाल किले पहुंचे। उनके साथ देश के पहले गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन और नए कैबिनेट के मंत्री भी मौजूद थे।
ऐतिहासिक क्षण: नेहरू जी ने जैसे ही रस्सी खींची, केसरिया, सफेद और हरे रंग का हमारा राष्ट्रीय ध्वज, जिसके केंद्र में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र था, हवा में खुल गया।
सलामी और गूँज: तिरंगे के लहराते ही पूरा लाल किला परिसर ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ के गूँजते हुए नारों से सराबोर हो गया। ब्रिटिश हुकूमत का प्रतीक रहा लाल किला अब आधिकारिक रूप से आज़ाद हिंदुस्तान का गढ़ बन चुका था। इसके बाद तिरंगे को 21 तोपों की सलामी दी गई।

3. इंडिया गेट का वो अविस्मरणीय नज़ारा

लाल किले के बाद, शाम को इंडिया गेट के पास ‘प्रिंसेस पार्क’ में एक और विशाल जनसभा हुई। यहाँ लगभग 5 लाख लोग जमा थे।
इंद्रधनुष और तिरंगा: जैसे ही शाम को वहाँ तिरंगा फहराया गया, ठीक उसी समय आसमान में एक खूबसूरत इंद्रधनुष दिखाई दिया। लोग भावुक हो उठे और इसे प्रकृति द्वारा आज़ाद भारत को दिया गया आशीर्वाद मानने लगे। भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि नेहरू जी की बग्गी को रास्ता देने के लिए खुद लॉर्ड माउंटबेटन को आगे आना पड़ा था।

4. एक रोचक तथ्य: झंडा फहराने की तारीख

बहुत कम लोग जानते हैं कि लाल किले पर पहली बार तिरंगा 15 अगस्त को नहीं, बल्कि 16 अगस्त 1947 की सुबह फहराया गया था। 15 अगस्त को मुख्य कार्यक्रम संविधान सभा (पार्लियामेंट) और प्रिंस पार्क में हुए थे, जबकि लाल किले पर नेहरू जी ने आधिकारिक रूप से अगले दिन सुबह झंडा फहराकर देश को संबोधित किया था। हालाँकि, लोक-स्मृति और इतिहास में ये दोनों दिन भारत की आज़ादी के उस महान उत्सव का हिस्सा बन गए।

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