ज्यादातर लोग सोचते हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को पूरी तरह आजाद हो गया था, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। जब दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा लहरा रहा था, तब भी गोवा, दमन और दीव पर पुर्तगालियों का कब्जा था। अंग्रेज तो भारत छोड़कर चले गए, लेकिन पुर्तगाली अपनी जिद पर अड़े रहे। आखिरकार, 1961 में भारत सरकार को सैन्य कदम उठाना पड़ा। Indiamitra के इस लेख में हम जानेंगे ‘ऑपरेशन विजय’ की वह शौर्य गाथा, जिसने गोवा को हमेशा के लिए भारत का अभिन्न हिस्सा बना दिया।
1. पुर्तगाली शासन: अंग्रेजों से भी पुरानी गुलामी
पुर्तगाली भारत में सबसे पहले (1498 में) आए थे और सबसे बाद में (1961 में) गए। उन्होंने 1510 में अल्बुकर्क के नेतृत्व में गोवा पर कब्जा किया था। 1947 के बाद जब भारत ने शांति से गोवा को सौंपने की बात कही, तो पुर्तगाली तानाशाह एंटोनियो सालाजार ने साफ मना कर दिया। उसका कहना था कि गोवा भारत का हिस्सा नहीं, बल्कि पुर्तगाल का एक ‘विदेशी प्रांत’ है।
2. सत्याग्रह और जन-आंदोलन: जब निहत्थों पर चलीं
गोलियाँ
भारतीय सेना के मैदान में उतरने से पहले, गोवा के भीतर और बाहर के लोगों ने शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया था।
स्थानीय नायक: डॉ. राम मनोहर लोहिया, जूलियाओ मेनेजेस और टी.बी. कुन्हा ने गोवा के भीतर आजादी की अलख जगाई।
1955 का महा-सत्याग्रह: भारत भर से हजारों सत्याग्रही गोवा की सीमा पर पहुंचे। पुर्तगाली पुलिस ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए निहत्थे सत्याग्रहियों पर गोलियां चला दीं, जिसमें 30 से अधिक लोग शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे भारत में आक्रोश की आग लगा दी।
3. ‘ऑपरेशन विजय’ (18-19 दिसंबर 1961): 36 घंटे का पराक्रम
जब कूटनीति के सारे रास्ते बंद हो गए, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सेना को हरी झंडी दिखाई। इस सैन्य अभियान को नाम दिया गया—’ऑपरेशन विजय’।
त्रिशूल आक्रमण: भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर तीनों दिशाओं से गोवा को घेरा।
वायुसेना का दम: भारतीय वायुसेना ने पुर्तगालियों के कम्यूनिकेशन टॉवर और डाबोलिम हवाई पट्टी को तहस-नहस कर दिया।
बिना शर्त आत्मसमर्पण: पुर्तगाली गवर्नर मैनुएल एंटोनियो वासालो ए सिल्वा ने समझ लिया कि भारतीय सेना के सामने टिकना नामुमकिन है। लिस्बन (पुर्तगाल) से ‘आखरी सांस तक लड़ने’ के आदेश के बावजूद, उन्होंने अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए 19 दिसंबर 1961 की शाम को आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर दस्तखत कर दिए।
4. आजादी की वो शाम और ऐतिहासिक महत्व
केवल 36 घंटे के भीतर, बिना किसी बड़े नुकसान के, भारत ने गोवा को मुक्त करा लिया। 451 साल पुराना विदेशी शासन हमेशा के लिए खत्म हो गया।
20 दिसंबर 1961 को मेजर जनरल के.पी. कैंडथ को गोवा का पहला सैन्य गवर्नर बनाया गया।
बाद में 1987 में गोवा को भारत का 25वां पूर्ण राज्य घोषित किया गया।

