15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद तो हुआ, लेकिन एक राष्ट्र के रूप में हमें एक ऐसे ‘नियमों की किताब’ की ज़रूरत थी जो विविधता से भरे इस देश को एक सूत्र में पिरो सके। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों और अधिकारों का घोषणापत्र था। Indiamitra के इस विशेष लेख में हम जानेंगे कि कैसे 2 साल, 11 महीने और 18 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार हुआ।
1. संविधान सभा (Constituent Assembly) का गठन
संविधान बनाने का विचार सबसे पहले 1934 में एम.एन. रॉय ने दिया था। 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन हुआ।
पहली बैठक: 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसकी अध्यक्षता अस्थायी रूप से डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया।
उद्देश्य प्रस्ताव: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘Objective Resolution’ पेश किया, जिसने हमारे संविधान के आदर्शों (न्याय, स्वतंत्रता और समानता) को तय किया।
2. डॉ. बी.आर. अंबेडकर: आधुनिक भारत के ‘मनु’
संविधान सभा में कई समितियाँ थीं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण थी ‘प्रारूप समिति’ (Drafting Committee)। इसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे।
उनकी कानून पर गहरी पकड़ और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी दृष्टि ने भारतीय संविधान को एक मानवीय चेहरा दिया। उन्हें ‘भारतीय संविधान का जनक’ (Father of Indian Constitution) कहा जाता है। उन्होंने दुनिया भर के संविधानों का बारीकी से अध्ययन किया और भारत की ज़रूरतों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ प्रावधानों को चुना।
3. विचार-विमर्श और बहस की लोकतांत्रिक प्रक्रिया
हमारा संविधान बंद कमरों में नहीं बना। हर एक अनुच्छेद (Article) पर संविधान सभा में गरमागरम बहस हुई।
विविधता का सम्मान: अल्पसंख्यकों के अधिकार, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण, भाषा का सवाल और केंद्र-राज्य संबंधों पर हफ़्तों तक चर्चा हुई।
लिखित साक्ष्य: इन बहसों को ‘Constituent Assembly Debates’ के रूप में आज भी सहेज कर रखा गया है, जो हमारी लोकतांत्रिक जड़ों की गहराई को दर्शाता है।
4. संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार (Adopt) किया गया। इसकी कुछ बातें इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं:
सबसे लंबा लिखित संविधान: इसमें मूल रूप से 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं।
उधार लिया गया लेकिन मौलिक: हमने ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार और आयरलैंड से नीति निदेशक तत्व लिए, लेकिन उन्हें भारतीय सांचे में ढालकर।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: आज़ादी के पहले दिन से ही हर नागरिक को (बिना किसी भेदभाव के) वोट देने का अधिकार देना एक क्रांतिकारी कदम था।
5. लागू होना और विरासत
26 जनवरी 1950 को भारत एक ‘गणतंत्र’ (Republic) बना। 1930 के पूर्ण स्वराज के संकल्प की याद में इसी तारीख को चुना गया था। आज 75 से अधिक वर्षों बाद भी, हमारा संविधान न केवल ज़िंदा है, बल्कि हर संकट में देश का मार्गदर्शन करता है। यह प्रेम, भाईचारे और कानून के शासन का एक अद्भुत जीवित दस्तावेज़ है।

