कोई भी संगठन कितना भी सोच समझकर क्यों न बनाया जाए उसमें समय काल एवं परिस्थितियों के अनुसार संशोधन करना ही पड़ता है। भारतीय संविधान लचीला तथा कठोर का मिश्रण है इसमें संशोधन का प्रावधान किया गया है। भारत का संविधान ना तो ब्रिटेन के भारतीय बहुत ही लचीला है और ना ही अमेरिका के भारतीय अत्यंत कठोर इसमें संशोधन ही ना किया जा सके बल्कि इन दोनों को संतुलित रखते हुए इसे निश्चित रूप में तैयार किया गया है।
भारतीय संविधान के भाग 20 के अंतर्गत अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान संशोधन के शक्ति संसद को प्रदान की गई भारतीय संविधान में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है-
- साधारण बहुमत द्वारा
- विशेष बहुमत द्वारा
- विशेष बहुमत व राज्यों के अनुमोदन से
- तीनों संशोधन विधेयक को संसद के सदन में प्रस्तुत किया जाता है जिसमें इसे दोनों सदनों में अलग-अलग पारित करवाना आवश्यक है।
यह संविधान संशोधन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाॅधी के समय स्वर्ण सिंह आयोग की सिफारिश के आधार पर किया गया था। यह अभी तक का सबसे बङा संविधान संशोधन है। इस संविधान संशोधन को लघु संविधान की संज्ञा दी जाती है। इस संविधान संशोधन में 59 प्रावधान थे।

जाने क्या है 42वा संविधान संशोधन 1976
42 वें संविधान संशोधन 1976 को अधिनियम द्वारा संविधान के बहुत सारे प्रावधानों में परिवर्तन परिवर्तन किया गया था तथा अनेक प्रावधान जोड़े गए थे इसलिए इसे लघु संविधान मिनी कॉन्स्टिट्यूशन का नाम दिया गया।
42 वें संविधान संशोधन का मुख्य उद्देश्य उच्चतम न्यायालय द्वारा 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य 1973 के मामले में न्यायालय ने अपने दिए गए निर्णय से उत्पन्न कठिनाई को दूर करना था क्योंकि इसमें उच्चतम न्यायालय ने गोलकनाथ बनाम पंजाब 1967 के मामले को पलटते हुए अपना निर्णय दिया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की कि संसद के संविधान संशोधन की शक्ति को इस मामले में निर्णय द्वारा संविधान के आधारभूत ढांचे को संशोधित करने से रोका जाएगा अर्थात संविधान के किसी भी भाग में संशोधन किया जा सकता है परंतु उसका मूल ढांचा परिवर्तित नहीं होना चाहिए।
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जाने क्या है 42 वें संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधान-
- संविधान की प्रस्तावना में पंथ निरपेक्ष समाजवादी और अखण्डता शब्दों को जोडा गया।
- मौलिक कर्तव्यों को संविधान में शामिल किया गया।शिक्षा, वन और वन्यजीव, राज्यसूची के विषयों को समवर्ती सूची में शामिल किया गया।
- लोक सभा और विधान सभा के कार्यकाल को बढाकर 5 से 6 वर्ष कर दिया गया।
- राष्ट्रपति को मंत्रीपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य किया गया।
- ससंद द्वारा किये गये संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती देने से वर्जित कर दिया गया है।शिक्षा, वन और वन्यजीव, राज्यसूची के विषयों को समवर्ती सूची में शामिल किया गया।
- लोक सभा और विधान सभा के कार्यकाल को बढाकर 5 से 6 वर्ष कर दिया गया।
- राष्ट्रपति को मंत्रीपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य किया गया।
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