सहारनपुर की केवल आठवीं तक पढ़ी बेटी हर्षिता अरोड़ा ने अमेरिका में सफलता के झंडे गाड़े हैं। वह दुनिया की प्रसिद्ध स्टार्टअप कंपनी वाई कांबीनेटर की सबसे कम उम्र की जनरल पार्टनर बनाई गई हैं। इसे लेकर परिवार में खुशी की लहर है। इससे पहले वह 2018 में 16 साल की उम्र में क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर एप बनाकर अपनी बुद्धिमता का लोहा मनवा चुकी हैं
हर्षिता की पारिवारिक पृष्ठभूमि
हर्षिता सहारनपुर के अहमद बाग की रहने वाली हैं। पिता योगेंद्र सिंह अरोड़ा बिजनेस करते हैं, जबकि मां जसविंदर कौर गृहिणी हैं। योगेंद्र सिंह अरोड़ा ने बताया कि जब हर्षिता ने नौवीं की पढ़ाई बीच ही में छोड़ी तो उनको झटका लगा कि यह क्या कर रही हैं, क्योंकि हमारे समाज में शिक्षा को सबसे आगे रखा जाता है। माना जाता है कि कोई भी बच्चा बिना शिक्षा के किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकता, लेकिन हर्षिता उनकी एकलौती बेटी है।
ऐसे में उन्होंने कहा कि वह जो करना चाहती हैं करें और उस पर पढ़ाई का दबाव नहीं डाला। योगेंद्र ने बताया कि हर्षिता ने आईटी के क्षेत्र में जाने की इच्छा जताई थी। पढ़ाई छोड़कर हर्षिता ने खुद ही बैंगलुरु में एक कंपनी से इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया, जो स्वीकार कर लिया गया। उसके बाद एमआईटी बोस्टन यूनिवर्सिटी में आवेदन किया, वहां भी स्वीकार कर लिया गया।
महज 15 साल की उम्र में किया इंटर्नशिप
15 साल की उम्र में वह डेढ़ महीने की इंटर्नशिप के लिए अमेरिका गईं। उसे करने के बाद वह भारत लौटीं। फिर उन्होंने एक एप पर काम किया। इसमें उन्होंने क्रिप्टो प्राइज ट्रैकर एप बनाया, जिसको दुनियाभर में पसंद किया गया। कुछ ही महीने में एप 40 से अधिक देशों में इस्तेमाल होने लगा। इसके बाद बड़ी मोबाइल कंपनी ने उस एप को खरीदा। इसके बाद एप की वजह से कनाडा में अवार्ड मिला। वहां से लौटने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया।

इसके बाद वह अमेरिका में शिफ्ट हो गईं। वहां दो दोस्तों के साथ मिलकर वाई कांबीनेटर की मदद से कंपनी बनाई। कुछ ही समय में कंपनी 6,700 करोड़ रुपये की बन गई। पिछले कुछ समय से हर्षिता वाई कांबीनेटर कंपनी में विजिटिंग पार्टनर के रूप में काम कर रही थी। हर्षिता के हुनर को देखते हुए कंपनी ने उसे जनरल पार्टनर बनाया है। यानी जिस वाई कांबीनेटर कंपनी से अपनी कंपनी के लिए फंड मांगने गई थी आज उसी कंपनी में यह तय करने वाली बन गई हैं कि किसे फंड देना है। बेटी की सफलता से पिता योगेंद्र सिंह अरोड़ा और मां जसविंदर कौर गदगद हैं।

