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जिंदगी भी ऐसा ही एक क्षेत्र है बशर्ते आप इन मुश्किलों को चैलेंज की तरह देखें और हर हाल में इनसे निपटने का अपना संकल्प बनाए रखें, यह बात कोई और नहीं बल्कि खुद अवनि ही साबित करती है। अवनि सिर्फ बातों से नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में अपने संकल्प, दृढ़ इच्छा शक्ति से  हासिल की गई अपनी उपलब्धियां से वह इसे साबित कर चुकी है।

रामानुजन का जन्म एक गरीब परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 को तमिलनाडु के इरोड़ कस्बे में हुआ था। उनके पिता एक साड़ी की दुकान पर क्लर्क का काम करते थे। रामानुजन के जीवन पर उनकी माँ का बहुत प्रभाव था।

हम बात कर रहे है असम के साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली भारतीय रेसर हिमा दास के बारे में जो आईएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ गोल्ड मैडल जितने वाली प्रथम भारतीय महिला बन गयी है |जिन्हें लोग एक ‘डिंग एक्सप्रेस ‘ के नाम से जानते है।

संतो ने शिष्यों से कहा- ” आज तुम सभी को  टोकरियों में जल भरकर लाना है। उसी जल से आश्रम की सफाई करनी है। याद रखना जल केवल वही होना चाहिए जो टोकरी में भरकर लाया गया हो। “

बहुत गरीब होने के कारण बेगम हजरत महल को राजशाही घरों में डांस करने पर मजबूर होना पड़ा । जहां पर इनको शाही हरम के एक परी समूह में शामिल कर लिया गया था । उसके बाद उन्हे‘महक परी’ के नाम से जाना जाने लगा।  एक बार उन्हें अवध के नवाब के यहां डांस करने के लिए बुलाया गया और जब वहां के नवाब ने उन्हें देखा

यदि हम किसी भी काम को लगातार करते रहते है , तो एक न एक दिन हमे उस काम में सफलता अवश्य मिलती है . हम इसी का उदारण ले लेते है जैसे

एक बार की बात है कोलकत्ते के एक स्कूल से विद्यार्थियों का एक समूह विलियम फोर्ट देखने गया किले की सुंदरता बहुत अद्वितीय थी बच्चे उस किले की एक -एक चीज देखने के लिए बहुत अधिक उत्साहित ….

यदि आप खुशियों को दूसरों के साथ बांटते हैं तो आपको स्वयं प्रसन्नता महसूस होगी। यदि आप किसी के लिए कुछ करते हैं, किसी की मदद करते हैं तो सच मानिए आप के आंतरिक रूप से सकारात्मक विचार उत्पन्न होंगे और आपको प्रसन्नता होगी।