समय वास्तव में सबसे बड़ा खजाना है कहते भी है अब नहीं तो कभी नहीं और अंग्रेजी में इसी को कहा गया है time is very precious Now or Never कहां जाता है।
एक बड़ी सन बड़ी ही सुंदर पंक्ति कहीं जाती है –
“अतीत एक सपना है,
भविष्य एक कल्पना है,
वर्तमान ही हमारा अपना है। “
इसलिए वर्तमान ईश्वर की ओर से मिला हुआ एक तोहफा है ऐसा समझ करके उसका सही प्रयोग करना चाहिए इसका महत्व समझकर इसे ईश्वर स्मृति सेवा और श्रेष्ठ कर्मों में लगाना ही वास्तविक पुरुषार्थ है। जब हम अपने संकल्प वचन और व्यवहार को मानवता की भलाई प्रभु ईश्वर में सफल बनाते हैं तभी मन निश्चित निर्भय और आनंद में बना रहता है हम आपको बताएं की सच्ची पुरुषार्थियों कर्म योगी की दो विशेष लक्षण होते हैं-
1. मोह को नष्ट करने वाला अर्थात देह अभियान से मुक्त रहन
2. जीवन की वास्तविक अर्थ को समझना।
सफलता अर्जित करने का मूल मंत्र होता है सामाजिक कल्याण यदि व्यक्ति के मन में सिर्फ खुद को बढ़ाने की इच्छा है तो वह कभी भी विकास नहीं कर सकता है असली विकास और असली सफलता तो दूसरों का भला चाहने में कोई है मनुष्य समाज कल्याण लोकगीत की भावना रखता है तो परमात्मा उसका साथ सबसे पहले देता है क्योंकि उसके मन में स्वार्थ की भावना नहीं है बल्कि सामाजिक कल्याण की भावनाएं इस वजह से पति व्यक्ति को सामाजिक कल्याण की भावना रखते हुए ही लाइफ में आगे बढ़ना चाहिए ऐसा करने से मनुष्य तरक्की की राह की होती जिस बढ़ता है और उसे सफलता प्राप्त होती है।