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Home»Special Story»रामकृष्ण परमहंस की सीख:रोज थोड़ा समय खुद के लिए निकालें,
Special Story

रामकृष्ण परमहंस की सीख:रोज थोड़ा समय खुद के लिए निकालें,

By Archana Dwivedi
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स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस अपनी सादगी और भक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। वे काली माता के परम भक्त थे। परमहंस जी के हर काम में एक सीख छिपी रहती थी। वे कभी हंसी में डूब जाते, कभी अचानक नाचने लगते, तो कभी देवी मां की मूर्ति के सामने भावविभोर होकर बेहोश हो जाते थे।

परमहंस जी के शिष्य अक्सर देखते थे कि उनके गुरु हर काम बिना किसी दिखावे के करते हैं, लेकिन एक बात सभी शिष्यों के मन में जिज्ञासा का कारण बनी रहती थी- वह बात थी परमहंस जी का लोटा साफ करने का तरीका।

परमहंस जी के पास एक पुराना लोटा था, इसका उपयोग वे अपने निजी कार्यों के लिए करते थे, लेकिन वे उसे दिन में कई बार धोते थे। सुबह उठते ही, भोजन के बाद और रात में सोने से पहले। हर बार वे उसे बड़ी तन्मयता से साफ करते थे। वे लोटे को केवल धोते ही नहीं थे, बल्कि उसे इस तरह चमकाते जैसे किसी पूजा की वस्तु को पवित्र कर रहे हों।

शिष्य ये देखकर हैरान रहते। एक दिन शिष्यों ने पूछा कि गुरुदेव, ये लोटा तो साधारण है। आप इसे इतनी लगन से क्यों मांजते हैं? क्या इसमें कोई रहस्य है?”

परमहंस जी बोले कि हां, ये लोटा वास्तव में जादुई है। जब मैं इसे साफ करता हूं, तो मैं सोचता हूं कि ये मेरा मन है। दिनभर में जैसे इस पर धूल जम जाती है, वैसे ही हमारे मन पर भी बुरे विचार, क्रोध, ईर्ष्या और लोभ की परतें चढ़ जाती हैं। अगर इन्हें समय-समय पर साफ न किया जाए, तो मन काला हो जाता है और हमें गलत रास्ते पर ले जाता है। जैसे मैं इस लोटे को रगड़-रगड़कर चमकाता हूं, वैसे ही अपने मन को भी हर दिन स्वच्छ करना चाहिए।

ये सुनकर शिष्य मौन हो गए। उन्हें समझ आया कि साधना केवल ध्यान या पूजा में नहीं, बल्कि हर छोटे कार्य में छिपी होती है।

रामकृष्ण परमहंस की सीख

रामकृष्ण परमहंस जी की ये कथा हमें सिखाती है कि मन की सफाई जीवन प्रबंधन की सबसे बड़ी कला है। जानिए इस किस्से की सीख…

  • दैनिक आत्मचिंतन करें

रोज कुछ समय खुद के लिए निकालें। सोचें कि आज आपने कौन से विचार अच्छे रखे और कहां गलती हुई। आत्ममंथन करने से हमारी बुराइयां दूर होती हैं।

  • भावनाओं को दबाएं नहीं, समझें

गुस्सा, दुख या ईर्ष्या को दबाने से ये बुराइयां अंदर जमा होकर मन को गंदा करती हैं। इन्हें पहचानें, स्वीकारें और धीरे-धीरे छोड़ दें।

  • सकारात्मकता बनाए रखें

रोज दूसरों के अच्छे काम के लिए उनकी सराहना करें, धन्यवाद करें। ये अभ्यास मन को सकारात्मकता से भर देता है और नकारात्मक विचारों को दूर रखता है।

  • अच्छी संगत में रहें

जिन लोगों के साथ आप रहते हैं, वे आपके विचारों को प्रभावित करते हैं। अच्छी संगति मन के लिए साबुन की तरह होती है। अच्छे लोग हमारी बुराइयां दूर कर देते हैं।

  • शरीर की तरह मन की सफाई भी जरूरी है

जैसे नहाना शरीर की गंदगी मिटाता है, वैसे ही प्रार्थना, ध्यान या संगीत मन को साफ करता है। दिन में कुछ देर मन की सफाई भी जरूर करें।

  • हर स्थिति में शांत रहें

अनावश्यक इच्छाएं और जटिलता मन को गंदा करती हैं। सरल जीवन अपनाने से मन अपने आप शांत हो जाता है। अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करें और शांत रहें।

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Archana Dwivedi
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I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

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