एक दिन राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक अजीब व्यक्ति आया। उसने दावा किया कि उसके पास एक जादुई आम का बीज है, जो रातों-रात पेड़ बन जाता है और सोने जैसे आम देता है।
राजा को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने तुरंत तेनालीराम को बुलाया और कहा, “तेनालीराम, अगर यह सच है तो हमारा राज्य बहुत समृद्ध हो जाएगा!”
तेनालीराम उस आदमी को ध्यान से देखने लगे। उन्हें उसकी बातों में कुछ गड़बड़ लगी। उन्होंने धीरे से कहा, “महाराज, इसे परखना जरूरी है।”
उस व्यक्ति ने कहा, “महाराज, यह बीज केवल ईमानदार व्यक्ति ही बो सकता है। अगर कोई बेईमान व्यक्ति इसे लगाएगा तो पेड़ नहीं उगेगा।”
यह सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया। कोई भी खुद को बेईमान साबित नहीं करना चाहता था।
तभी तेनालीराम आगे आए और बोले, “महाराज, मैं यह बीज बो सकता हूँ… लेकिन एक शर्त पर।”
राजा ने पूछा, “क्या शर्त?”
तेनालीराम बोले, “पहले इस व्यक्ति को साबित करना होगा कि यह बीज सच में जादुई है। क्योंकि अगर यह झूठा निकला, तो यह हम सबको बेवकूफ बना रहा है।”
वह आदमी घबरा गया, लेकिन बोला, “ठीक है, आज रात मैं खुद इसे बोकर दिखाता हूँ।”
रात में तेनालीराम ने गुप्त रूप से उस जगह की निगरानी करवाई। उन्होंने देखा कि वह व्यक्ति बीज बोने का नाटक कर रहा है और पहले से तैयार छोटा पौधा मिट्टी में लगा रहा है।
सुबह होते ही वह आदमी राजा के सामने बोला, “देखिए महाराज! पेड़ उग आया!”
तभी तेनालीराम मुस्कुराते हुए आगे आए और बोले, “महाराज, यह जादू नहीं, चालाकी है। यह व्यक्ति पहले से पौधा लाकर यहाँ लगा गया है।”
उन्होंने सैनिकों को इशारा किया, और सच्चाई सामने आ गई। वह आदमी डर गया और अपनी गलती मान ली।
राजा बहुत खुश हुए और बोले, “तेनालीराम, तुम्हारी बुद्धि ने हमें धोखे से बचा लिया!”
सीख (Moral):
हर चमकती चीज सोना नहीं होती — समझदारी से ही सच पहचाना जा सकता है।

