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भारत के इतिहास में ऐसे ही शख्स हुए हैं, जिनका नाम है तेनालीराम। तेनालीराम की बुद्धिमानी से भला कौन परिचित नहीं है। तेनालीराम की जीवनी विजयनगर नगर से ही शुरू होती है। जहां वह महाराज कृष्णदेव राय के सबसे प्रिय मंत्री हुआ करते थे। वह उन्हें हर उलझन से निकालने में मदद करते थे। तेनालीराम के किस्से तब भी प्रसिद्ध थे

एक बार किसी बात से रुष्ट होकर महाराज कृष्णादेव राय ने तेनालीराम को मृत्युदंड दे दिया। समाचार आग की तरह पूरे नगर में फैल गया। जिस दिन यह समाचार फैला उसी दिन से तेनालीराम लोगों को दिखाई देने बंद हो गए। तभी लोगों की ऐसी धारणा बन गई की तेनालीराम को चुपचाप फांसी पर चढ़ा दिया गया है। लोग तेनालीराम को याद कर करके चर्चा करते और महाराज को भी दबी जुबान से बुरा भला कहते, कितने योग्य व्यक्ति को मृत्युदंड दे दिया गया।

दोस्तों ऐसे तो आपने तेनालीराम और कृष्णदेव राय की हजारों कहानियां सुनी होगी परंतु आज हम आपको एक बेहतरीन कहानी से अवगत कराने वाले हैं जिसका शीर्षक है’पौधे की जड़े ‘ । आइए जानते हैं कि क्या है कहानी।

तेनालीराम की पत्नी को गुलाब के बड़े-बड़े फूलों को जुड़े में लगाने का बेहद शौक था। उसकी पसंद के फूल केवल राज उद्यान में ही थे।अतः वह बेटे को वहां भेजकर चोरी से एक फूल रोज तुड़वा लेती थी।

महाराज कृष्णदेव राय कई बार अपने दरबारियो की विलक्षण परीक्षाएं लिया करते थे।ऐसे ही उन्होंने एक दिन भरे दरबार मे सभी छोटे-बड़े दरबारियों को हज़ार-हज़ार अशर्फियो से भरी एक – एक थैली दी, फिर बोले आप सब को 1 सप्ताह का समय दिया जाता है सप्ताह भर के अंदर अंदर आपने यह धन अपने ऊपर खर्च करना है। किंतु शर्त यह है कि आप लोग खर्च करते समय हमारा मुंह अवश्य देखें।सभी दरबारियो ने हँसी-खुशी वह थैलिया ले ली और अवकाश बाजार की ओर चल दिए।।

सम्राट कृष्ण देव राय का दरबार लगा था ,महाराज दरबारियों के साथ हल्की फुल्की चर्चा में व्यस्त थे कि अचानक चतुर और चतुराई पर चर्चा जब पड़ी। महाराज के अधिकांश मंत्री और यहां तक कि राजगुरु भी तेनाली राम से जलते थे महाराज के समक्ष अपने दिल की बात रखने का मौका अच्छा था, अतः एक मंत्री बोले-

एक बार एक पड़ोसी राजा ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया। महाराज कृष्ण देव राय और दरबारियों की सूझ-बूझ से कृष्ण देवराय ने वह युद्ध जीत लिया। और विजय उत्सव की घोषणा की।

तेनालीराम किसी कारणवश उचित समय पर उत्सव में ना आ सका। उत्सव की समाप्ति पर महाराज ने कहा,