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एक बार जब राजा कृष्णदेवराय जेल का सर्वेक्षण करने के लिए गए, तो वहाँ पर बंदी बनाए गए दो चोरों ने राजा से दया करने की सिफारिश की । उन्होंने बताया कि वो दोनों चोरी करने में माहिर थे, इसलिए वे दोनों अन्य चोरों को पकड़ने में राजा की मदद कर सकते हैं।

एक बार की बात है विजयनगर साम्राज्य में विद्युलता नाम की एक अहंकारी महिला रहती थी . उसे अपनी उपलब्धियों पर बहुत गर्व था और वह हमेशा अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करना पसंद करती थी. एक दिन उसने अपने घर के बाहर एक बोर्ड लगा दिया

राजा कृष्णदेवराय को घोड़े बहुत पसंद थे और उनके पास राज्य के घोड़ों की नस्लों का सबसे अच्छा संग्रह था। खैर, एक दिन, एक व्यापारी राजा के पास आया और उसे बताया कि वह अपने साथ अरब में सबसे अच्छी नस्ल का एक घोड़ा लाया है।

एक बार राजा कृष्णदेवराय दरबार में बैठे मंत्रियों के साथ विचार विमर्श कर रहे थे कि तभी एक व्यक्ति उनके सामने आकर कहने लगा,”महाराज मेरे साथ न्याय करें। मेरे मालिक ने मुझे धोखा दिया है। इतना सुनते ही महाराज ने उससे पूछा, तुम कौन हो? और तुम्हारे साथ क्या हुआ है।”

तेनाली राम से जुड़े ऐसे कई चुटीले किस्से हैं, जो न सिर्फ हर किसी को गुदगुदाते हैं, बल्कि हंसी-हंसी में एक सीख भी दे जाते हैं। 
आज ऐसी ही  तेनालीराम की एक कहानी हम आपके  लिए लेकर आए हैं। हमारी आज की कहानी का शीर्षक है-जटाधारी सन्यासी

भारत के इतिहास में ऐसे ही शख्स हुए हैं, जिनका नाम है तेनालीराम। तेनालीराम की बुद्धिमानी से भला कौन परिचित नहीं है। तेनालीराम की जीवनी विजयनगर नगर से ही शुरू होती है। जहां वह महाराज कृष्णदेव राय के सबसे प्रिय मंत्री हुआ करते थे। वह उन्हें हर उलझन से निकालने में मदद करते थे। तेनालीराम के किस्से तब भी प्रसिद्ध थे

एक बार किसी बात से रुष्ट होकर महाराज कृष्णादेव राय ने तेनालीराम को मृत्युदंड दे दिया। समाचार आग की तरह पूरे नगर में फैल गया। जिस दिन यह समाचार फैला उसी दिन से तेनालीराम लोगों को दिखाई देने बंद हो गए। तभी लोगों की ऐसी धारणा बन गई की तेनालीराम को चुपचाप फांसी पर चढ़ा दिया गया है। लोग तेनालीराम को याद कर करके चर्चा करते और महाराज को भी दबी जुबान से बुरा भला कहते, कितने योग्य व्यक्ति को मृत्युदंड दे दिया गया।

दोस्तों ऐसे तो आपने तेनालीराम और कृष्णदेव राय की हजारों कहानियां सुनी होगी परंतु आज हम आपको एक बेहतरीन कहानी से अवगत कराने वाले हैं जिसका शीर्षक है’पौधे की जड़े ‘ । आइए जानते हैं कि क्या है कहानी।

तेनालीराम की पत्नी को गुलाब के बड़े-बड़े फूलों को जुड़े में लगाने का बेहद शौक था। उसकी पसंद के फूल केवल राज उद्यान में ही थे।अतः वह बेटे को वहां भेजकर चोरी से एक फूल रोज तुड़वा लेती थी।

महाराज कृष्णदेव राय कई बार अपने दरबारियो की विलक्षण परीक्षाएं लिया करते थे।ऐसे ही उन्होंने एक दिन भरे दरबार मे सभी छोटे-बड़े दरबारियों को हज़ार-हज़ार अशर्फियो से भरी एक – एक थैली दी, फिर बोले आप सब को 1 सप्ताह का समय दिया जाता है सप्ताह भर के अंदर अंदर आपने यह धन अपने ऊपर खर्च करना है। किंतु शर्त यह है कि आप लोग खर्च करते समय हमारा मुंह अवश्य देखें।सभी दरबारियो ने हँसी-खुशी वह थैलिया ले ली और अवकाश बाजार की ओर चल दिए।।