Close Menu
  • 🏠 होम
  • देश
  • धर्म
  • प्रेरणादायक
  • रोचक तथ्य
  • लाइफस्टाइल
  • वीमेन डायरी
  • हेल्थ एंड ब्यूटी
    • योग
    • होम्योपैथी
  • इंडिया मित्र सीरीज
    • लॉकडाउन के सितारे
    • गुदड़ी के लाल
Facebook X (Twitter) Instagram
  • About
  • Contact
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
Facebook X (Twitter) Instagram
India MitraIndia Mitra
Download Our App
  • 🏠 होम
  • देश
  • धर्म
  • प्रेरणादायक
  • रोचक तथ्य
  • लाइफस्टाइल
  • वीमेन डायरी
  • हेल्थ एंड ब्यूटी
    • योग
    • होम्योपैथी
  • इंडिया मित्र सीरीज
    • लॉकडाउन के सितारे
    • गुदड़ी के लाल
India MitraIndia Mitra
Home»tenali raman stories»तेनालीराम की कहानियां – दो हाथ धुँआ
tenali raman stories

तेनालीराम की कहानियां – दो हाथ धुँआ

Updated:June 13, 2021
Facebook WhatsApp Twitter Telegram Pinterest LinkedIn Email
Share
Facebook WhatsApp Twitter Telegram LinkedIn Pinterest Email

सम्राट कृष्ण देव राय का दरबार लगा था ,महाराज दरबारियों के साथ हल्की फुल्की चर्चा में व्यस्त थे कि अचानक चतुर और चतुराई पर चर्चा जब पड़ी। महाराज के अधिकांश मंत्री और यहां तक कि राजगुरु भी तेनाली राम से जलते थे महाराज के समक्ष अपने दिल की बात रखने का मौका अच्छा था, अतः एक मंत्री बोले-

“महाराज! आपके दरबार में चतुर लोगों की कमी नहीं है, यदि मौका मिले तो यह बात सिद्ध हो सकती हैं, मगर …।”

मगर क्या मंत्री जी ? उत्सुकता से महाराज ने पूछा।

” मैं बताता हूं महाराज! सेनापति अपने स्थान से उठकर बोला- ” मंत्री जी कहना क्या चाहते है कि तेनालीराम के सामने किसी को अपनी योग्यता सिद्ध करने का अवसर ही नहीं मिलता हर मामले में तेनाली राम अपनी टांग अड़ा देते है और चतुराई का सारा श्रेय स्वयं ले जाते हैं।

अन्नदाता! जब तक दूसरे लोगों को अवसर नहीं मिलेगा वे अपनी योग्यता भला कैसे सिद्ध करेंगे ? महाराज गंभीर हो गए। समझ गए कि सभी दरबारी तेनालीराम के विरुद्ध है।कुछ क्षणों तक वे कुछ सोचते रहे। अचानक ही उनकी दृष्टि एक कोने में ठाकुर जी की प्रतिमा के सामने जलती धूप पर स्थिर हो गई, और तुरंत ही उन्हें दरबारियों की परीक्षा लेने का उपाय सूझ गया ।

वह बोले -” आप लोगों को अपनी योग्यता सिद्ध करने का अवसर अवश्य दिया जाएगा, तेनालीराम बीच में नहीं आएंगे ।”

“ठीक से महाराज!” सभी दरबारियों प्रसन्न हो उठे, कहिए , हम क्या करें।”

“मुझे इस धूपबत्ती का दो हाथ धुआं चाहिए।”‌ महाराज में कोने में जलती धूपबत्ती की और संकेत करके का जो भी दरबारी या कार्य करेगा, उसे तेनाली राम से भी चतुर समझा जाएगा।”

सम्राट का प्रश्न सुनकर सभी दरबारी सिटपिटा गए , की यहां कैसी मूर्खतापूर्ण परीक्षा है।”

भला धुआं भी कभी नापा जाता है। मगर कोई ना कोई युक्ति तो लगानी ही थी । कई दरबारियों ने हाथ से धुआं नापने की कोशिश की किंतु धुआं‌ भला कैसे नपता ??

वह तो ऊपर उठता और बलखाए सांप की तरह इधर-उधर लहर जाता, सुबह से शाम हो गई , मगर कोई भी धुआं ना नाप सका । महाराज कृष्णदेव राय मंद -मंद मुस्कुरा रहे थे । जब सभी दरबारी थक- हारकर बैठ गए तो,एक दरबारी बोला- “महाराज!

धुंए को नापना हमारी दृष्टि में तो असंभव है, हां , यदि तेनाली राम इस कार्य को कर देगा तो हम उसे, अपने से चतुर मान लेंगे। मगर यदि वह भी न कर सका तो आप उसे हमारे समान समझेंगे और अधिक मान सम्मान नहीं देंगे । “महाराज कृष्ण देव ने मुस्कुराते हुए तेनालीराम की तरफ देखा-“क्यों तेनालीराम, क्या तुम्हें दरबारियों की चुनौती स्वीकार है ?

“मैं भी कोशिश ही कर सकता हूं अन्नदाता, तेनालीराम अपने स्थान से उठकर विनम्रता से सिर झुका कर बोला मैंने सदा आपके आदेश का पालन किया है इस बार भी करूंगा। तेनाली ने सेवक से अपने करीब बुलाकर उसके कान में कुछ कहा, सेवक तत्काल वहां से चला गया। दरबार में सन्नाटा छाया रहा। सभी उत्सुक थे कि देखे तेनालीराम कैसे धुएं को नापकर राजा को दो हाथ धुआं सौंपते हैं। तभी सेवक शीशे की दो हाथ लंबी एक नली लेकर दरबार में हाजिर हुआ। तेनालीराम ने धूप बत्ती से उठतेहुए धुएं पर उस नली का मुंह लगा दिया। धुआँ नली में भरने लगा। कुछ ही देर में पूरी नली धुएं से भर गई।तेनालीराम ने कपड़ा ठूंस कर नली का मुंह बंद कर दिया फिर उसे महाराज की और बढ़ाकर बोला – “लीजिये महाराज ! दो हाथ धुआं।” महाराज ने मंद- मंद मुस्कुराते हुए नली ले ली , फिर दरबारियों की ओर देखा , सभी के सिर झुके हुए थे कुछ एक दरबारी , जो तेनालीराम से ईर्ष्या नहीं करते थे, आंखों में प्रशंसा के भाव लिए तेनालीराम को देख रहे थे महाराज बोले- अब तो आप लोग मान गए कि तेनालीराम बुद्धिमान है और उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता , सभी दरबारियों के सर शर्म से झुक गए।

Share. Facebook WhatsApp Twitter Telegram Pinterest LinkedIn Email
Previous Articleजयंती विशेष: पढ़िए काकोरी कांड के महानायक की कहानी, हथियारों के लिए बेच दी थी अपनी लिखी किताब
Next Article मदर टेरेसा का जीवन परिचय , रोचक तथ्य एवं 10 अनमोल विचार

Related Posts

कहानी: “तेनालीराम और जादुई आम का पेड़”

March 30, 2026

🧠 तेनालीराम की चतुराई – “चोरों को सबक”

March 11, 2026

तेनालीराम की बुद्धिमानी – “सोने का आम”

March 1, 2026
लेटेस्ट स्टोरीज

इसरो (ISRO) का सफर: साइकिल और बैलगाड़ी से मंगलयान और चंद्रयान तक की गौरवगाथा

May 31, 2026

उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली कटौती: आखिर क्या हैं इसके कारण और समाधान?

May 30, 2026

पोखरण परमाणु परीक्षण: ‘बुद्ध फिर मुस्कुराए’ – भारत की परमाणु शक्ति का उदय।

May 30, 2026

लाल किले पर पहला तिरंगा – 15 अगस्त 1947 की वह सुबह जब भारत ने सदियों बाद अपनी आज़ादी का सूरज देखा

May 29, 2026
उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली कटौती: आखिर क्या हैं इसके कारण और समाधान?

May 30, 2026

🚨 मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट: कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी, खराब मौसम को लेकर चेतावनी

May 25, 2026

भूमिका: एक महान विजन की सिद्धि

May 22, 2026

पीएम मोदी की अपील के बाद बदलेगा सरकारी काफिलों का तरीका

May 12, 2026
सरकारी योजनाये

उत्तर प्रदेश सरकार की पहल: UPSI अभ्यर्थियों के लिए फ्री बस सेवा

March 12, 2026

आयुष्मान भारत मिशन क्या है, आयुष्मान कार्ड कैसे बनवाये

August 24, 2023

क्या आप जानते हैं?.. क्या है उत्तर प्रदेश सरकार की ” परिवार कल्याण कार्ड योजना”

August 25, 2022

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज व आवेदन की प्रक्रिया

May 4, 2022

News

  • World
  • US Politics
  • EU Politics
  • Business
  • Opinions
  • Connections
  • Science

Company

  • Information
  • Advertising
  • Classified Ads
  • Contact Info
  • Do Not Sell Data
  • GDPR Policy
  • Media Kits

Services

  • Subscriptions
  • Customer Support
  • Bulk Packages
  • Newsletters
  • Sponsored News
  • Work With Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 India Mitra | All Rights Reserved. Designed by RG Marketing.
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Contact

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.