तेनालीराम की चतुराई की कहानियाँ आज भी बच्चों और बड़ों को खूब पसंद आती हैं। यह उनकी सबसे प्रसिद्ध और मज़ेदार कहानियों में से एक है।
कहानी शुरू होती है…
एक बार कृष्णदेवराय की माता जी बीमार थीं। अंतिम समय में उन्होंने आम खाने की इच्छा जताई। लेकिन वह आम का मौसम नहीं था, इसलिए आम मिल नहीं पाए। कुछ ही समय बाद उनका देहांत हो गया।
राजा बहुत दुखी थे। दरबार के कुछ लालची पंडितों ने राजा से कहा—w
“महाराज, आपकी माता की आत्मा की शांति के लिए 108 सोने के आम दान कीजिए।”62w6
राजा ने बिना सोचे-समझे सोने के 108 आम बनवाकर दान कर दिए।
樂 तेनालीराम की योजनाc
जब तेनालीराम को यह बात पता चली तो उन्हें लगा कि पंडितों ने राजा की भावनाओं का फायदा उठाया है।
उन्होंने एक योजना बनाई।
कुछ समय बाद तेनालीराम ने अपने घर पर श्राद्ध का आयोजन किया और उन्हीं पंडितों को बुलाया। भोजन के बाद उन्होंने अपने नौकर से कहा—
“इन पंडितों को 108 गरम सलाखों से दाग दो!”
पंडित डर गए और बोले—
“यह क्या अन्याय है?”
तेनालीराम शांत स्वर में बोले—
“मेरी माँ की इच्छा थी कि उनके घुटनों का दर्द गरम सलाखों से ठीक किया जाए, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। इसलिए मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए यह कर रहा हूँ।”
पंडितों को अपनी गलती समझ में आ गई। वे तुरंत राजा के पास गए और सारी बात बता दी।
परिणाम
राजा कृष्णदेवराय को सच्चाई पता चली तो उन्होंने पंडितों को दंड दिया और तेनालीराम की बुद्धिमानी की प्रशंसा की।
✨सीख
किसी की भावनाओं का फायदा नहीं उठाना चाहिए।
बुद्धि और साहस से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

