विजयनगर साम्राज्य में राजा कृष्णदेव राय का शासन था। उनके दरबार में सबसे बुद्धिमान और हाजिरजवाब व्यक्ति थे—तेनालीराम। एक दिन राज्य में अफ़वाह फैल गई कि महल के पास ज़मीन के नीचे कोई पुराना खजाना छिपा है।
राजा ने सोचा, “अगर खजाना मिल जाए तो राज्य की भलाई के काम आएगा।” उन्होंने कुछ विद्वानों और सैनिकों को बुलाया, पर कोई भी खजाने का सही स्थान नहीं बता सका।
तभी तेनालीराम दरबार में आए और बोले,
“महाराज, खजाना ज़रूर है, लेकिन उसे पाने के लिए ताकत नहीं, दिमाग़ चाहिए।”
राजा ने उत्सुकता से पूछा, “कैसे?”
तेनालीराम ने कहा, “आज रात महल के बाहर सब लोग शांत रहें। मैं अकेला जाँच करूँगा।”
रात को तेनालीराम ने ज़मीन पर जगह-जगह गड्ढे खोदने के बजाय वहाँ सूखी लकड़ियाँ रख दीं। सुबह होते ही उन्होंने राजा को बुलाया।
राजा ने देखा—एक जगह की लकड़ियाँ बाकी जगहों से ज़्यादा अंदर धँसी हुई थीं।
तेनालीराम बोले,
“महाराज, जहाँ ज़मीन कमज़ोर होगी, वहीं नीचे कुछ छिपा होगा।”
जब वहाँ खुदाई करवाई गई, तो सचमुच पुराने समय के सोने के सिक्के और मूर्तियाँ मिलीं।
राजा बहुत खुश हुए और बोले,
“तेनालीराम, तुमने बिना ज़्यादा मेहनत के बड़ा काम कर दिखाया।”
तेनालीराम मुस्कराकर बोले,
“महाराज, बुद्धि से किया गया काम हमेशा आसान होता है।”
कहानी से शिक्षा
समझदारी और सूझ-बूझ से मुश्किल से मुश्किल समस्या हल हो सकती है।

