विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध राजा कृष्णदेवराय के दरबार में कई गुणी विद्वान थे, लेकिन उनमें सबसे चतुर और हाज़िरजवाब थे तेनालीराम। उनकी बुद्धि, चतुराई और हास्य से पूरा राज्य प्रभावित था। तेनालीराम हमेशा अपनी सूझबूझ से लोगों को सही रास्ता दिखाते थे।
कहानी: सोने की मछली का लालच
एक दिन राज्य में खबर फैली कि पास के गाँव की नदी में एक सोने जैसी चमकने वाली मछली देखी गई है। लोग दूर-दूर से उसे देखने पहुंचने लगे। हर कोई सोच रहा था कि शायद वह मछली सोने की है और उसे पकड़कर अमीर बन सकता है।
जब यह बात राजा के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने तेनालीराम को बुलाया।
राजा बोले:
“तेनालीराम! पता करो यह मामला क्या है। अगर सच में कोई अनोखी मछली है, तो उसे राजमहल में लाया जाए।”
तेनालीराम मुस्कुराए और बोले,
“महाराज, मैं अभी जाकर इसकी जाँच करता हूँ।”
गाँव में अफरा-तफरी

तेनालीराम गाँव पहुँचे तो देखा कि सभी लोग नदी के किनारे जाल, डंडे और कई सामान लेकर खड़े हैं। हर कोई मछली पकड़ने के पीछे पड़ा था।
तभी एक लालची आदमी बोला:
“अगर मैं यह मछली पकड़ लूँ, तो राजा मुझे सोने की थैली देंगे!”
दूसरा बोला:
“अरे! मैं पकड़ूँगा तो मुझे पूरा गाँव सलाम करेगा!”
तेनालीराम ने मछली देखी — वह असल में सोने की नहीं थी, बल्कि इसकी चमक बस पानी की वजह से दिखाई दे रही थी। यह तो एक साधारण मछली थी।
लेकिन गाँव वाले समझने को तैयार नहीं थे।
तेनालीराम की चाल
तेनालीराम ने कहा,
“अगर कोई इस मछली को पकड़ ले, तो राजा उसे सवा लाख सोने के सिक्के देंगे!”
इतना सुनते ही सबके होश उड़ गए। लोग और भी तेजी से मछली पकड़ने में जुट गए। मगर मछली बहुत तेज थी—किसी के हाथ न आई।
काफी देर बाद लोग थक कर बैठ गए। तेनालीराम हँसते हुए बोले—
“तुम सब अपने लालच के कारण बेकार में भाग-दौड़ कर रहे हो। यह मछली सोने की नहीं, बस पानी की वजह से चमकती है।”
सब चौंक गए।
लालच का परिणाम
तेनालीराम आगे बोले:
“जो लोग लालच में अंधे हो जाते हैं, वे सच को नहीं देख पाते। असली सोना किसी मछली में नहीं, बल्कि मेहनत और बुद्धि में होता है।”
सभी लोगों को अपनी गलती समझ आई। उन्होंने तेनालीराम से माफी मांगी।
राजा का सम्मान
जब तेनालीराम ने दरबार में पूरी घटना सुनाई, तो राजा हँस पड़े और बोले—
“तेनालीराम, तुमने सिर्फ सच्चाई ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य को एक बड़ा सबक भी सिखाया है।”
कहानी का संदेश (Moral)
लालच का अंत हमेशा बुरा होता है।
जो चीज दूर से बड़ी लगती है, वह पास से वैसी नहीं होती।
मेहनत और बुद्धि असली धन हैं।

