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Home»धर्म»अक्षय तृतीया को है स्वयंसिद्ध मुहूर्त का योग, ऐसे करें पूजन पूरी होंगी समस्त मनोकामनाएं..
धर्म

अक्षय तृतीया को है स्वयंसिद्ध मुहूर्त का योग, ऐसे करें पूजन पूरी होंगी समस्त मनोकामनाएं..

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हमारे शास्त्रों तथा ग्रंथों में अक्षय तृतीया  की तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण व शुभ फलदायक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मांगलिक कार्य जैसे-विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार अथवा उद्योग का आरंभ करना अति शुभ फलदायक होता है। सही मायने में अक्षय तृतीया अपने नाम के अनुरूप शुभ फल प्रदान करती है। अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं।

अक्षय तृतीया का अर्थ

सनातन धर्म में अक्षय तृतीया शुभ दिन माना जाता है। इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को ही अक्षय तृतीया के नाम से जानते हैं।  इस वर्ष अक्षय तृतीया 10 मई, 2024 को मनाई जाएगी। अक्षय शब्द का अर्थ है कभी कम न होना, इस प्रकार, यह माना जाता है कि इस त्योहार पर सोना खरीदने से अनंत धन की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए किसी भी काम का पुण्य क्षय नहीं होता। इसलिए इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। इतना ही नहीं अक्षय तृतीया के दिन सोने की खरीदारी करना काफी शुभ माना जाता है।

आईए जानते हैं कि अक्षय तृतीया को कौन से कार्य करने शुभ माने जाते हैं-

* पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान,दान,जप,स्वाध्याय आदि करना शुभ फलदायी माना जाता है इस तिथि में किए गए शुभ कर्म का फल क्षय नहीं होता है इसको सतयुग के आरंभ की तिथि भी माना जाता है इसलिए इसे’कृतयुगादि’ तिथि भी कहते हैं । 

* मत्स्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन अक्षत पुष्प दीप आदि द्वारा भगवान विष्णु की आराधना करने से विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा संतान भी अक्षय बनी रहती है। 

* कलियुग के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करके दान अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से निश्चय ही अगले जन्म में समृद्धि, ऐश्वर्य व सुख की प्राप्ति होती है। 

* दान को वैज्ञानिक तर्कों में ऊर्जा के रूपांतरण से जोड़ कर देखा जा सकता है। दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित करने के लिए यह दिवस सर्वश्रेष्ठ है। 

* इस तिथि को चारों धामों में से उल्लेखनीय एक धाम भगवान श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं। अक्षय तृतीया को ही वृंदावन में श्रीबिहारीजी के चरणों के दर्शन वर्ष में एक बार ही होते हैं।

* वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है। 

* अक्षय तृतीया के विषय में मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसमें बरकत होती है। यानी इस दिन जो भी अच्छा काम करेंगे उसका फल कभी समाप्त नहीं होगा अगर कोई बुरा काम करेंगे तो उस काम का परिणाम भी कई जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ेगा।

* धरती पर देवताओं ने 24 रूपों में अवतार लिया था। इनमें छठा अवतार भगवान परशुराम का था। पुराणों में उनका जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था।

 अक्षय तृतीया  की पूजन करने का शुभ मुहूर्त..

अक्षय तृतीया पर बन रहे हैं ये शुभ योग
तृतीया तिथि आरंभ: 10 मई, शुक्रवार, प्रातः 04:16 मिनट पर
तृतीया तिथि समाप्त: 11 मई, शनिवार तड़के 02:51 मिनट पर 

अक्षय तृतीया का दिन स्वयं सिद्ध मुहूर्त है यानी ये पूरा दिन ही अत्यंत शुभ फलदायक है। इस दिन राहुकाल को छोड़कर दिनभर में कभी भी सोना खरीद सकते हैं।  राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा। 

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