दुनिया की प्रमुख मुद्राओं जैसे डॉलर ($), पाउंड (£) और यूरो (€) की तरह ही भारतीय रुपये की भी अपनी एक विशिष्ट पहचान है। 15 जुलाई 2010 को भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर रुपये के नए प्रतीक ‘₹’ को अपनाया था। इस अनोखे चिह्न को डिजाइन करने का श्रेय डी. उदय कुमार को जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस छोटे से चिह्न में भारत की संस्कृति, लिपि और अर्थव्यवस्था का गहरा अर्थ छिपा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
1. कौन हैं डी. उदय कुमार?
इस गौरवशाली चिह्न के रचनाकार उदय कुमार धर्मलिंगम (डी. उदय कुमार) हैं। जब भारत सरकार ने रुपये के लिए एक नए प्रतीक की प्रतियोगिता आयोजित की थी, तब उदय कुमार आईआईटी बॉम्बे के छात्र थे। हजारों प्रविष्टियों में से उनके डिजाइन को सर्वश्रेष्ठ चुना गया। आज वे आईआईटी गुवाहाटी में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
2. रुपये के प्रतीक (₹) का बनावट और अर्थ
उदय कुमार ने इस प्रतीक को बहुत सोच-समझकर तैयार किया था। इसके पीछे कई तकनीकी और सांस्कृतिक कारण हैं:
देवनागरी और रोमन का संगम: यह प्रतीक देवनागरी लिपि के अक्षर ‘र’ (Ra) और रोमन अक्षर ‘R’ (बिना वर्टिकल लाइन के) का मिश्रण है। यह भारत की पारंपरिक जड़ों और आधुनिक अंतरराष्ट्रीय पहचान को एक साथ दर्शाता है।
समानता का प्रतीक (Equal To): इसमें ऊपर की ओर दो क्षैतिज रेखाएं (Parallel Lines) हैं। यह रेखाएं भारत के तिरंगे झंडे का प्रतिनिधित्व करती हैं और साथ ही गणितीय चिह्न ‘समानता’ (=) को भी दर्शाती हैं, जो एक संतुलित और मजबूत अर्थव्यवस्था का प्रतीक है।
शिरोरेखा का महत्व: देवनागरी लिपि की विशेषता ‘शिरोरेखा’ (शब्दों के ऊपर खींची जाने वाली रेखा) को इसमें विशेष स्थान दिया गया है, जो भारतीय संस्कृति की विशिष्टता को बनाए रखती है।
3. भारत बना दुनिया का पांचवां देश
इस चिह्न को अपनाने के साथ ही भारत दुनिया का वह पांचवां देश बन गया, जिसकी मुद्रा की अपनी एक अलग पहचान (Unique Identity) है। इससे पहले केवल अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरोपीय संघ के यूरो के पास ही अपने प्रतीक चिह्न थे। इसने वैश्विक स्तर पर भारतीय रुपये की साख और पहचान को और मजबूत किया।
4. चयन की प्रक्रिया और राष्ट्रीय गर्व
भारत सरकार ने 2009 में एक खुली प्रतियोगिता के माध्यम से पूरे देश से डिजाइन मांगे थे। इस प्रतियोगिता की शर्त थी कि प्रतीक भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और विविधता को प्रदर्शित करना चाहिए। उदय कुमार का डिजाइन न केवल सरल था, बल्कि इसे टाइप करना और प्रिंट करना भी आसान था।
निष्कर्ष
भारतीय रुपया (₹) का यह चिह्न आज हर भारतीय के बटुए और देश की प्रगति की कहानियों का हिस्सा है। यह एक उभरते हुए शक्तिशाली भारत का प्रतीक है। डी. उदय कुमार द्वारा दिया गया यह उपहार हमें अपनी भाषा और अपनी मुद्रा पर गर्व करना सिखाता है। आपकी अपनी वेबसाइट Indiamitra पर हमारा प्रयास है कि हम ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियाँ आप तक पहुँचाते रहें।

