भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जब भी संविधान की बात होती है, तो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम सबसे पहले आता है, जिन्होंने इसे तैयार किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मूल प्रति (Original Copy) को हम देखते हैं, उसे किसी मशीन या टाइपराइटर से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति ने अपनी सुंदर लिखावट (Calligraphy) से हाथ से लिखा था? उस महान कलाकार का नाम था— प्रेम बिहारी नारायण रायजादा। आइए, संविधान के इस अनकहे इतिहास को करीब से जानते हैं।
1. कौन थे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा?
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा का जन्म दिल्ली के एक नामी कैलीग्राफर परिवार में हुआ था। उन्होंने कैलीग्राफी की कला अपने दादाजी से सीखी थी। जब भारत का संविधान तैयार हो गया, तब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि इसे हाथ से लिखा जाए ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक कलात्मक विरासत बने।
2. जब नेहरू जी ने पूछी ‘फीस‘
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि जब नेहरू जी ने रायजादा से संविधान लिखने का अनुरोध किया और उनसे उनकी मेहनत की ‘फीस’ पूछी, तो रायजादा का जवाब सुनकर नेहरू जी दंग रह गए। रायजादा ने कहा— “मुझे एक भी पैसा नहीं चाहिए। भगवान की कृपा से मेरे पास सब कुछ है। मेरी बस एक शर्त है कि संविधान के हर पन्ने पर मेरा नाम हो और आखिरी पन्ने पर मेरे नाम के साथ मेरे दादाजी का नाम हो।” सरकार ने उनकी यह सम्मानजनक शर्त मान ली।
3. छह महीने की कड़ी मेहनत और 303 पेन की निब
संविधान को लिखने का कार्य संविधान सभा के एक विशेष कमरे में शुरू हुआ। रायजादा ने इस विशाल कार्य के लिए 303 नंबर की पेन निब का उपयोग किया और 254 होल्डर पेन का सहारा लिया। उन्होंने पूरे संविधान को ‘इटैलिक स्टाइल’ (Italic Style) में लिखा। इस महान कार्य को पूरा करने में उन्हें लगभग 6 महीने का समय लगा। इस दौरान उन्होंने एक भी गलती नहीं की, जो उनकी एकाग्रता का प्रमाण है।
4. कला और सौंदर्य का अद्भुत संगम: शांतिनिकेतन के कलाकार
संविधान की मूल प्रति केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह कला का भी उत्कृष्ट नमूना है। जहाँ रायजादा ने इसे अपनी लेखनी से सजाया, वहीं इसके हर पन्ने पर बॉर्डर और चित्रकारी करने का कार्य नंदलाल बोस के नेतृत्व में शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किया। उन्होंने संविधान में मोहनजोदड़ो, वैदिक काल, रामायण, महाभारत और बुद्ध के जीवन से जुड़े चित्रों को उकेरा, जो भारत की सांस्कृतिक यात्रा को दर्शाते हैं।
5. आज कहाँ सुरक्षित है मूल प्रति?
संविधान की यह मूल हस्तलिखित प्रति 22 इंच लंबी और 16 इंच चौड़ी है। इसका वजन लगभग 3.75 किलोग्राम है। आज यह मूल प्रति भारतीय संसद के पुस्तकालय (Library) में हीलियम से भरे एक विशेष कांच के केस में सुरक्षित रखी गई है, ताकि कागज़ और स्याही खराब न हो।
निष्कर्ष
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जैसे निस्वार्थ कलाकारों के योगदान के बिना हमारा संविधान अधूरा होता। उन्होंने अपनी कला को राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आपकी अपनी वेबसाइट Indiamitra का उद्देश्य ऐसे ही गुमनाम नायकों और उनके महान कार्यों को दुनिया के सामने लाना है।

