30 जनवरी 2024 को महात्मा गांधी की 76वीं पुण्यतिथि मनाई गयी हैं।यह दिन शहीद दिवस का भी प्रतीक है। यह उन सभी शहीदों को याद करने और सम्मान देने का दिन है जिन्होंने अपने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
Author: Archana Dwivedi
महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद्र गांधी था, जो ब्रिटिश राज के समय काठियावाड़ की एक छोटी सी रियासत के दीवान थे।
यह कहानी गौतम बुद्ध पर आधारित है आईए जानते हैं इस कहानी में गौतम बुद्ध जी ने आने वाली पीढ़ी को क्या शिक्षा दी है……
एक बार की बात है भगवान बुद्ध एक नगर में पधारे उसे नगर का मंत्री बहुत ही नेक,ईमानदार और अच्छे दिल का था। वह महल के अंदर अपने महाराज के पास गया और उसने बोला “महाराज हमारे नगर में भगवान बुद्ध पधारे हैं।
26 जनवरी के प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस मनाया जाता है इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था जैसा कि आप सभी जानते हैं कि इस दिन प्रत्येक देशवासी 26 जनवरी (26 January) को पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाता है। इस साल देश अपना 74वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) मनाएगा। इस खास मौके पर हर साल इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक राजपथ पर भव्य परेड भी होती है।
गौतम बौद्ध का जन्म 563 ई.पूर्व में नेपाल में हुआ था। गौतम बुद्ध का बचपन में सिद्धार्थ नाम रखा गया था। गौतम के पिता का नाम नरेश सुद्धोधन और उनकी माता का नाम महादेवी था।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने मंगलवार को राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2023 का अंतिम चयन परिणाम जारी किया।माधव मौजूदा समय में प्रयागराज में समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं।उत्तर प्रदेश की सूची में माधव का 10वां नंबर आया है। माधव अपनी सफलता के लिए अपने पिता हरिओम उपाध्याय और मां आशा देवी व शिक्षकों को श्रेय देते हैं।
4.स्तंभों की कहानी: मंदिर में कुल 366 खंभे हैं, जिन पर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां बनी हैं। ये मूर्तियां शिव के अवतार, विष्णु के दशावतार, 64 योगिनियों और देवी सरस्वती के 12 अवतारों को दर्शाती हैं।
मंदिर का निर्माण कार्य जोर-शोर से चल रहा है। यह मंदिर भारत-नेपाली वास्तुकला की शैली में बन रहा है। मंदिर 161 फीट ऊंचा, 380 फीट लंबा और 250 फीट चौड़ा होगा। इसमें तीन गुंबद होंगे, जो भगवान
राजा के बंदरों ने भूरी श्रम और संघर्ष के बावजूद आखिरकार संजीवनी बूटी प्राप्त की और राजा के बाग में लाई। इसे खोजने में जो दुर्बलताएं आईं, वे उनके
