पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत पुत्र प्राप्ति और संतान सुख के लिए किया जाता है। यह मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
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सफला एकादशी हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली 24 एकादशियों में से एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, जो सृष्टि के पालनकर्ता और भक्ति के प्रतीक हैं। “सफला” का अर्थ है “सफलता”
हिंदू सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है आज 11 दिसंबर 2024 मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है। एकादशी…
मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाला बालक शुभ प्रभाव में है तो वह सामान्य बालक से कुछ अलग विचारों वाला होता है यदि उसे सामाजिक तथा पारिवारिक बंधन से मुक्त कर दिया जाए तो ऐसा बालक जिस भी क्षेत्र में जाएगा एक अलग मुकाम हासिल करेगा।
पौष व चैत्र दोनों सौरमास खरमास कहलाता है। अन्य प्रचलित कथा के अनुसार इस महीने सूर्य के रथ में खर…
एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी…
हिंदू सनातन धर्म में एकादशी के एक दिन बाद यानी त्रयोदशी को प्रदोष मनाया जाता है । इस दिन महिलाएं…
हिंदू सनातन धर्म देव उठानी एकादशी का विशेष महत्व की क्योंकि इस दिन भगवान चार माह के बाद जागते हैं और इस दिन से सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं ऐसा माना जाता है कि देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी और शालिग्राम भी भगवान का विवाह हुआ था इसलिए देवउठनी एकादशी में तुलसी माता की शालिग्राम भगवान के साथ विवाह कर के पूजा की जाती
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार देवउठनी एकादशी का व्रत 12 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन से सभी शुभ व मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं.
हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को छठ पूजा का पहला दिन शुरू होता है और इसी दिन नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है इस दिन कुछ खास रीति-रिवाजों का पालन करना शुभ माना जाता है।
