बहुत समय पहले विजयनगर में तेनालीराम नाम के एक बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति रहते थे। वे राजा कृष्णदेव राय के दरबार में मंत्री थे। उनकी चतुराई की चर्चा पूरे राज्य में होती थी।
एक दिन तेनालीराम को पता चला कि कुछ चोर उनके घर में चोरी करने की योजना बना रहे हैं। तेनालीराम ने चोरों को सबक सिखाने की योजना बनाई।
रात को उन्होंने अपनी पत्नी से ऊँची आवाज में कहा,
“सुनो, घर में जो भी कीमती गहने और पैसे हैं, उन्हें इस बड़े संदूक में रखकर कुएँ में डाल देते हैं, ताकि चोर उन्हें चुरा न सकें।”

चोर बाहर छिपकर यह बात सुन रहे थे। जैसे ही तेनालीराम और उनकी पत्नी सोने का नाटक करने लगे, चोर धीरे-धीरे आए और कुएँ से संदूक निकालने की कोशिश करने लगे।
कुएँ से पानी निकालने में चोर पूरी रात मेहनत करते रहे। वे बहुत थक गए, लेकिन संदूक नहीं मिला। सुबह होने लगी तो चोर डरकर भाग गए।
तेनालीराम बाहर आए और हँसते हुए बोले,
“धन्यवाद चोरों! तुमने मुफ्त में मेरे कुएँ की सफाई कर दी।”
असल में तेनालीराम ने संदूक कुएँ में डाला ही नहीं था। उन्होंने चोरों को बेवकूफ बनाकर उनसे काम करवा लिया।
सीख (Moral):
बुद्धिमानी से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

