Author: Archana Dwivedi

I’m Archana Dwivedi - a dedicated educator and founder of an educational institute. With a passion for teaching and learning, I strive to provide quality education and a nurturing environment that empowers students to achieve their full potential.

महागौरी का स्वरूप नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा का महागौरी स्वरूप पूजित होता है।”गौरी” का अर्थ है गोरी, उज्ज्वल और पवित्र। माता महागौरी का वर्ण चंद्रमा की भाँति श्वेत है। उनका रूप शांत, सौम्य और करुणामयी है।वे अपने चार भुजाओं में त्रिशूल, डमरू और वरमुद्रा धारण करती हैं तथा एक हाथ से अभय देती हैं। उनका वाहन सफ़ेद बैल (वृषभ) है। माता महागौरी की प्रिय वस्तुएँ और रंग प्रिय रंग : सफेद एवं हरे रंग को अत्यधिक प्रिय मानते हैं। अतः अष्टमी तिथि पर इन रंगों के वस्त्र पहनना और माता को अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय…

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नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि का रूप देखने में जितना भयावह है, उतना ही वे अपने भक्तों के लिए मंगलकारी और कल्याणकारी मानी जाती हैं। इसी कारण उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। उनका स्मरण मात्र ही सभी पाप, दुख और भय का नाश कर देता है।माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत अद्भुत है। उनका पूरा शरीर काले रंग का है, केश बिखरे हुए हैं और गले में चमकती माला शोभा देती है। वे चार भुजाओं वाली हैं—दाहिने हाथ में अभय और वरमुद्रा तथा बाएँ हाथ में वज्र और तलवार…

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माता कात्यायनी, नवदुर्गा का छठा रूप हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर नामक असुर का वध कर देवताओं को अत्याचार से मुक्त कराया। इन्हें शक्ति और वीरता की देवी माना जाता है। माता कात्यायनी का जन्म पुराणों के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया। चूँकि इनका जन्म ऋषि कात्यायन के घर हुआ, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा गया। माता कात्यायनी का स्वरूप माता कात्यायनी चार भुजाओं वाली…

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नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंद माता का विधि विधान से पूजन एवं अर्चन किया जाता है। स्कंदमाता की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आईये जानते हैं कि क्यों इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है और क्या है इनका पूजा करने का विधान? जिससे माता की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है और माता सदैव प्रसन्न रहती हैं। माता को स्कन्दमाता इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भगवान स्कन्द (कार्तिकेय / कुमार / मुरुगन) की माता हैं। विस्तार से कारण: 1. भगवान शिव और पार्वती की संतान –जब असुरों का अत्याचार बढ़ा और तारकासुर जैसे दानव को मारने के…

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अरथ / नाम: चंद्रघंटा = चन्द्र (चाँद) + घंटा (घंटी/घण्टा)। उनके माथे पर अर्धचंद्र के साथ घंटा जैसा भाव माना जाता है। स्वरूप: उनके चेहरे का भाव शांत दऔरयालु है, पर उनका रूप माता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवार की देवी हैं। उनके तीसरे रूप में वे दह हाथ-ग्यारह हाथ/दस हाथ लिये दिखती हैं (ग्रंथों में भेद है) — जिनमें त्रिशूल, खड्ग/तलवार, गदा, धनुष-बाण, कमण्डल, त्रिशूल आदि होते हैं। सवारी: अक्सर माता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवारमाता चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवार दिखाया जाता है — यह साहस और भय दूर करने का प्रतीक…

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नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है।यह देवी माँ का तपस्विनी स्वरूप है, जिन्होंने भगवान शिव को पति स्वरूप पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इनका नाम “ब्रह्मचारिणी” इसलिए पड़ा क्योंकि ये ब्रह्म (तप, ज्ञान और व्रत) का आचरण करती हैं। ✨ स्वरूप और महत्व माता ब्रह्मचारिणी के दाएँ हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमंडलु होता है। ये तपस्या और संयम का प्रतीक हैं। इनकी उपासना से साधक को धैर्य, संयम और तपस्या की शक्ति प्राप्त होती है। छात्र, साधक और जीवन में कठिन साधनाएँ करने वाले विशेष रूप से इनकी कृपा…

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स्वामी विवेकानंद, भारत के महान योगी और विचारक, अपनी जीवन यात्रा में हमेशा नए अनुभवों और शिक्षाओं की तलाश में रहते थे। एक बार उनकी यात्रा उन्हें राजस्थान के अजमेर ले गई। वहाँ का प्रसिद्ध घाट, जो लोगों के स्नान और ध्यान के लिए जाना जाता है, विवेकानंद के ध्यान और आत्मचिंतन का स्थल बन गया। घाट पर पहुँचते ही उन्होंने देखा कि वहाँ रोजाना बहुत भीड़ रहती है। कुछ लोग वहाँ स्नान करने आते हैं, कुछ खेलते हैं, और कुछ केवल हँसी-ठिठोली करते हैं। स्वामी जी ने घाट के किनारे शांत बैठे और ध्यान में लीन हो गए। थोड़ी…

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नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।‘शैल’ का अर्थ है पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ है पुत्री। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण शैलपुत्री कहलाती हैं। माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल पुष्प होता है। वे वृषभ (बैल) पर विराजमान रहती हैं।माँ शैलपुत्री को सभी सिद्धियों और शक्तियों का मूल आधार माना जाता है। माँ शैलपुत्री की कथा पिछले जन्म में वे सती थीं और भगवान शिव की पत्नी बनीं।जब उनके पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया, तब सती ने यज्ञकुंड में कूदकर अपना देह…

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नवरात्रि भारत के बहुत ही पवित्र त्यौहार है। यह देवी मां दुर्गा की आराधना का पर्व है। जैसा कि आप सब जानते हैं की नवरात्रि साल में दो बार आती है – चैत्र नवरात्रि ( मार्च और अप्रैल ) और शारदीय नवरात्रि ( सितंबर और अक्टूबर )इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है और 1 अक्टूबर 2025 तक रहेगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त -: पंडितों के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। इस दिन माँ दुर्गा का स्वागत कलश स्थापना करके किया जाता है।तारीख – 22 सितम्बर 2025 (सोमवार)शुभ मुहूर्त – सुबह…

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वसंत ऋतु छाई हुई थी। राजा कृष्णदेव राय बहुत ही खुश थे। वह तेनालीराम के साथ बाग में टहल रहे थे। वह चाह रहे थे कि एक ऐसा उत्सव मनाया जाए, जिसमें उनके राज्य के सारे लोग शामिल हों। पूरा राज्य उत्सव के आनंद में डूब जाए। इस विषय में वह तेनालीराम से भी राय लेना चाहते थे। तेनालीराम ने राजा की इस सोच की प्रशंसा की और इसके बाद राजा ने विजयनगर में राष्ट्रीय उत्सव मनाने का आदेश दे दिया। शीघ्र ही नगर को स्वच्छ करवा दिया गया, सड़कों व इमारतों में रोशनी की व्यवस्था कराई गई। पूरे नगर…

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